
बुलंदशहर. मुस्लिम समाज में बहूविवाह और निकाह-हलाला के खिलाफ केंद्र सरकार के सख्त रुख के बाद अब मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। बता दें कि बुलंदशहर की 27 वर्षीय फरजाना ने बहूविवाह और निकाह-हलाला को असंवैधानिक करार देने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी, जिसमें उसने पति और हलाला करने का दबाव बनाने वाले व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कराने की मांग की थी। अब फरजाना के समर्थन में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच भी आ गया है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के प्रदेश संयोजक कदीम तीन तलाक पीड़िता फरजाना से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने फरजाना को हर संभव मदद करने की घोषणा की है। इसके साथ ही मंच ने फरजाना को गैर सरकारी पेंशन के तौर पर 500 रुपये प्रतिमाह देने की बात कही है। साथ ही कहा कि फरजाना की बच्ची को किसी अच्छे स्कूल में इंटर तक की शिक्षा नि:शुल्क दिलाने के लिए प्रशासन से मांग की जाएगी।
यहां बता दें कि सिकंदराबाद के मोहल्ला भाटियावाड़ा निवासी फरजाना की शादी 25 मार्च, 2012 को मुस्लिम रीति-रिवाजों के साथ अब्दुल कादिर निवासी नरसाई मस्जिद कासना जिला गौतमबुद्धनगर से हुई थी। एक वर्ष बाद जब फरजाना गर्भवती हुई तो पति द्वारा पूर्व में की गई शादी का पता चल गया। इसको लेकर उसने पति से बात की तो दोनों के बीच मनमुटाव हो गया। फरजाना का आरोप है कि इसके बाद ससुरालियों ने उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया और पति अक्सर उससे मारपीट करने लगा। 2014 में पति ने उसे गैरकानूनी तरीके से तलाक (तीन तलाक) दे दिया। तब से ही फरजाना अपनी बेटी के साथ माता-पिता के यहां रह रही है।
बताया जा रहा है की अभी हाल फिलहाल में फरजाना का पति उसको रखने के लिए तैयार हो गया, लेकिन उसने अपने मुंह बोले पिता के साथ हलाला करने की शर्त रख दी। पति के इस प्रस्ताव को फरजाना ने ठुकरा दिया और सिकंदराबाद कोतवाली में पति और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। जिला पुलिस इस पूरे मामले में फूंक-फूंककर कदम रख रही है। तीन तलाक, हलाला जैसे शब्दों को जुबान पर लाने से भी बच रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने फरजाना की तहरीर पर रिपोर्ट की पुष्टि कर दी है।