सुवासा गांव में लक्ष्मी भील के छह बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं मिल रहा।
सुवासा [बूंदी]. सुवासा गांव में लक्ष्मी भील के छह बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं मिल रहा। पति रामचंद्र भील की मौत के बाद पिता के पास रह रही लक्ष्मी भील के पास न तो परिवार राशन कार्ड है और न ही आधार कार्ड। बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं बना। सरकारी मूलभूत सुविधाओं के लिए लक्ष्मी बाई बच्चों के साथ संघर्ष कर रही है। उसने कई बार ये दस्तावेज बनवाने की कोशिश की, लेकिन कागजी अड़चनों के चलते दस्तावेज नहीं बने।
जानकारी के अनुसार लक्ष्मी भील अपने पति रामचंद्र के साथ करीब15 वर्ष पहले भीलवाड़ा से अपने पीहर सुवासा गांव मजदूरी करने आई थी। यहां कुछ साल बाद पति की बीमारी से मौत हो गई। ऐसे में लक्ष्मी अपने बुजुर्ग पिता के पास ही रूक गई। लक्ष्मी के चार पुत्रियां और दो पुत्र है। पति की असमय मृत्यु के बाद परिवार को पालने की जिम्मेदारी नाना और मां पर आ गई। लक्ष्मी और उसके बच्चों के पास न तो आधार कार्ड है और न ही राशन कार्ड। बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं बना। ऐसे में परिवार को सरकार की ओर से मिलने वाली विधवा पेंशन, पालनहार योजना, खाद्य सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी बुनियादी सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा।
मजदूरी के लिए बाहर
बच्चों का पेट भरने के लिए लक्ष्मी मजदूरी के लिए बाहर जाती हैं। स्कूल में दाखिला नहीं होने से उसके बच्चे पूजा [12], नीमा [11], आरती [10], भैरू [9], गीता [8] और सूरज [5] दिनभर गांव के बाजार में घूमते रहते है और लोगों से भिक्षा मांगते हैं। शाम को घर लौटकर जो भी भोजन मिलता है, खा लेते हैं।
सभी बच्चों का स्कूल प्रशासन से बातचीत कर जल्दी दाखिला कराया जाएगा। - प्रियंका गोस्वामी, प्रशासक सुवासा ग्राम पंचायत
लक्ष्मी भील का परिवार गांव से बाहर रहता है। फिर भी बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं रखा जाएगा। स्कूल से शिक्षकों को उनके घर भेजकर आवश्यक दस्तावेजों के बिना भी उन्हें स्कूल से जोड़ा जाएगा। राकेश जैन, प्रधानाचार्य, राजकीय सीनियर सैकण्डरी स्कूल, सुवासा
लक्ष्मी भील का परिवार गांव में कब से रह रहा है, इसकी हमें जानकारी नहीं है। ग्राम विकास अधिकारी से जानकारी लेंगे कि इनके प्रमाण पत्र क्यों नहीं बने। जल्दी ही इनके दस्तावेज बनाने का प्रयास किया जाएगा- नीता पारीक, विकास अधिकारी, तालेड़ा