बूंदी

अवैध खनन का चल रहा खुला खेल, हो रहा बजरी का भण्डारण

चम्बल नदी बजरी की जननी है। बारिश में जब पानी आता है तो यह जगह-जगह बजरी का ढेर कर जाता है।
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Apr 02, 2019
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अवैध खनन का चल रहा खुला खेल, हो रहा बजरी का भण्डारण

केशवरायपाटन. चम्बल नदी बजरी की जननी है। बारिश में जब पानी आता है तो यह जगह-जगह बजरी का ढेर कर जाता है। यह सिलसिला सदियों से चला आ रहा है। जानकार बताते हैं कि यहां बनास से अधिक बजरी का भण्डार है। जहां बजरी माफिया बजरी का खनन कर अच्छी कमाई कर रहे है। केशवरायपाटन से70किलोमीटर के दायरे में यह भण्डार है। चार दशक पहले चम्बल से बजरी व पत्थर लाना सभी के लिए खुला था। जिसको जितनी आवश्यकता होती थी वह अपने ट्रैक्टर में बजरी भर कर ले आता था। बजरी भरने के लिए मजदूरों को ही शुल्क देना पड़ता था। जब से चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य अस्तित्व में आया तब से यहां पर अवैध खनन चालू हो गया।
इन स्थानों पर भण्डार
राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य में चम्बल नदी के किनारे केशवरायपाटन, सूनगर, बीरज, टाकरवाडा, डोलर, जगदरी, रोटेदा, बलदेवपुरा, खेड़लीबंधा, बसवाड़ा, बहडावली, माखीदा से लेकर इन्द्रगढ़ तक चम्बल नदी के किनारे बजरी के भण्डार हैं, जहां पर अवैध खनन चल रहा है। कई स्थानों पर तो नावों से बजरी निकाली जाती है। चम्बल की बजरी कोटा, बंूदी के कस्बों, शहरों व गांवों तक जाती है।
देखते रहते हैं सब
राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध बजरी खनन में लिप्त दबंगों के आगे किसी की नहीं चलती है। चम्बल नदी के किनारों से बजरी खनन करने के बाद वाहन केशवरायपाटन, कापरेन, देहीखेडा, लाखेरी, इन्द्रगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र और केशवरायपाटन, रोटेदा, देहीखेड़ा नाका के कर्मचारियों के सामने से आसानी से निकल जाते हैं। कोई भी इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है। सूनगर निवासी बहादुर सिंह ने बताया कि बताया कि बजरी माफियाओं ने अधिकारियों से सांठगांठ कर रखी है। इसलिए इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।
जिम्मेदारों का कहना
पुलिस समय समय पर बजरी माफियाओं एवं वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई करती है। इनका सूचना तंत्र मजबूत है। जब पुलिस पहुंचती है तब तक यह फरार हो जाते है। जनता को जागरूक रह कर इनके विरूद्ध खड़ा होना पड़ेगा। बजरी खनन का मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा दिया है। टीम बनाकर कार्रवाई की जाएगी।
महावीर जोशी, वृत्ताधिकारी केशवरायपाटन
राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य क्षेत्र में तीन चौकियां बना रखी है। संसाधन के अभाव से बजरी खनन नहीं रोक पा रहे है। स्टाफ की कमी है। हथियार भी नहीं दे रखे हैं। जो संसाधन उपलब्ध हैं, उनके बलबूते पर ही खनन को रोकते हैं।
देवेन्द्र गुर्जर, वन अधिकारी राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य केशवरायपाटन

Published on:
02 Apr 2019 01:41 pm