बूंदी

बच्चो को शिक्षा देने के साथ ही शिक्षक किशनलाल जगा रहे नशा मुक्ति की अलख

नशा...नाश की जड़ है, फिर चाहे वह गुटखा, तंबाकू खाने का शौक हो या फिर शराब पीने का
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Apr 16, 2019
bachcho ko shiksha dene ke saath hee shikshak kishanalaal jaga raha na
बच्चो को शिक्षा देने के साथ ही शिक्षक किशनलाल जगा रहा नशा मुक्ति की अलख

जजावर. नशा...नाश की जड़ है, फिर चाहे वह गुटखा, तंबाकू खाने का शौक हो या फिर शराब पीने का। एक बार जो इसकी गिरफ्त में आ जाता है, छोडऩा मुश्किल होता है। इस मुश्किल काम को दृढ़ इच्छा शक्ति और सही मार्ग दर्शन से ही पूरा किया जा सकता है। यह कहना है मूलत: दुगारी गांव के निवासी व पेशे से सरकारी अध्यापक किशनलाल कहार का। जो जजावर कस्बे के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय ताकला में बतौर शिक्षक कार्यरत हैं। किशनलाल अभ तक कई लोगों को नशे से मुक्त करा चुके हैं।
यहां से मिली प्रेरणा
किशन ने बताया कि नशा मुक्ति की अलख जगाने की प्रेरणा शिक्षक लादु लाल सेन से मिली। जिन्होंने अपने जीवन काल में कई लोगों को नशे से दूर किया। छात्रों को लगातार पे्ररित करते रहे।
तो कर डाली गीतों की रचना
नशा मुक्ति अभियान चला रहे शिक्षक कहार ने नशा छोड़ो न भायावो..., नशा हानिकारक छ र... आदि गीतों की रचना कर डाली। जो शिक्षा विभाग में कई मौकों पर गाया जाता है। इनके नशा मुक्ति के गीतों को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बूंदी प्रचेता वार्षिक 2017-18 व शोधपत्र को जिला शिक्षा अनुसंधान वाक्पीठ की रश्मि 2017 - 18 में प्रकाशित किया गया।

Updated on:
16 Apr 2019 09:31 pm
Published on:
16 Apr 2019 09:31 pm