मेज नदी पर 37.50 करोड़ रुपए की लागत से बना हाई लेवल ब्रिज संवेदक के इंतजार में अटका हुआ है। ऐसे में उस पर अभी डामरीरण नहीं हो पाया है, जबकि सार्वजनिक निर्माण विभाग ने पूर्व में इस पर मार्च माह में ही आवागमन शुरू किए जाने की बात कही थी।
बड़ाखेड़ा. मेज नदी पर 37.50 करोड़ रुपए की लागत से बना हाई लेवल ब्रिज संवेदक के इंतजार में अटका हुआ है। ऐसे में उस पर अभी डामरीरण नहीं हो पाया है, जबकि सार्वजनिक निर्माण विभाग ने पूर्व में इस पर मार्च माह में ही आवागमन शुरू किए जाने की बात कही थी। छह महीनों से पुल तक जानी वाली सडक़ का निर्माण का कार्य चल रहा है, लेकिन अब तक केवल गिट्टी बिछाई गई है।
डामरीकरण का काम शुरू नहीं होने से पुलिया के दोनों ओर अधूरी सडक़ लोगों के लिए परेशानी और जोखिम दोनों बन गई है। रोजमर्रा के सफर में धूल, फिसलन और असुविधा ने लोगों की ङ्क्षजदगी को कठिन बना दिया है। मार्च के अंतिम सप्ताह में इस पुल से आवागमन शुरू होने की उम्मीद थी। ग्रामीणों को विश्वास था कि अब बरसात में रास्ता नहीं रुकेगा और पुरानी पुलिया की समस्या से छुटकारा मिलेगा, लेकिन संवेदक की धीमी कार्यप्रणाली और बढ़ती लागत खासतौर पर डामर की महंगाई ने इस उम्मीद को झटका दे दिया। गौरतलब है कि मेज नदी में 2020 में यात्रियों से भरी बस नदी में गिर गई थी और 24 लोगों की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद इस पुल का निर्माण लोगों के लिए सुरक्षा और राहत की उम्मीद बनकर आया था। लेकिन आज भी अधूरी सडक़ उस उम्मीद को पूरा नहीं होने दे रही है।
छह माह से आश्वासन
छह माह से अभियंता ग्रामीणों को सिर्फ काम जल्द पूरा होगा कह रहे है, लेकिन हर बीतते दिन के साथ यह वादा एक नई निराशा में बदल जाता है। एप्रोच सडक़ पर बिछी गिट्टी से स्कूल जाते बच्चे, खेतों की ओर जाते किसान और रोजमर्रा के काम से निकलते लोग सब इस अधूरी सडक़ की मार झेल रहे हैं।
डामर (बिटुमेन) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। पहले डामर की कीमत करीब 47 हजार रुपए प्रति टन थी, जो अब बढक़र लगभग 90 हजार रुपए प्रति टन हो गई है। इस अचानक आई महंगाई ने डामरीकरण कार्य की रफ्तार को धीमा कर दिया है, जिससे सडक़ निर्माण में देरी हो रही है। मेज नदी की पुलिया पर एप्रोच सडक़ पर गिट्टी बिछाने सहित बाकी कार्य अगले 10 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन इसके बाद डामरीकरण कब शुरू होगा, इसको लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
हिमांशु दाधिच, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, लाखेरी