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Bundi : दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे के लबान इंटरचेंज से बदली क्षेत्र की तस्वीर

क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर लबान में बने जिले के एकमात्र इंटरचेंज ने माखिदा, लबान स्टेशन बस्ती और आसपास के गांवों की तस्वीर बदल दी है।

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Mar 15, 2026
लबान. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे

लबान. क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर लबान में बने जिले के एकमात्र इंटरचेंज ने माखिदा, लबान स्टेशन बस्ती और आसपास के गांवों की तस्वीर बदल दी है। इंटरचेंज शुरू होने के बाद से कोटा-दौसा मेगा हाईवे से जुड़ा यह क्षेत्र अब तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। दिनभर वाहनों की आवाजाही बढ़ने से बाजारों में रौनक बढ़ी है। वहीं किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर भी खुलने लगे हैं। एक्सप्रेस वे से क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलेगी, वहीं बेरोजगारों का गांवों से पलायन भी रुकेंगे।

बाजारों में बढ़ी चहल-पहल
खरायता पंचायत के लबान स्टेशन बस्ती में सुबह से देर शाम तक वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। ट्रक, निजी वाहन और व्यावसायिक गाडिय़ां यहां रुककर आवश्यक खरीदारी कर रही हैं। इससे चाय-नाश्ते की दुकानों, ढाबों, ऑटो पाट्र्स, किराना और अन्य छोटे व्यवसायों की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। दुकानदारों का कहना है कि पहले जहां दिनभर में सीमित ग्राहक आते थे, अब नियमित रूप से बाहरी लोग भी बाजार का रुख कर रहे हैं।

देश के बड़े शहरों से जुड़ा क्षेत्र
एक्सप्रेस वे बनने से क्षेत्र का दिल्ली, मुंबई, बड़ोदरा और इंदौर जैसे औद्योगिक शहरों से सीधा जुड़ाव हो गया है। इससे पहले जहां इन शहरों तक पहुंचने में कई दिन लग जाते थे, वहीं अब यह दूरी घंटों में तय हो रही है।

माखिदा में नया बाजार
इंटरचेंज के पास स्थित माखिदा और लबान स्टेशन क्षेत्र में सडक़ किनारे नया बाजार आकार लेने लगा है। कई युवाओं ने छोटे-मोटे व्यापार, वाहन सर्विस, ढाबा और अन्य सेवाएं शुरू की हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और पलायन में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

औद्योगिक विकास की प्रबल संभावना
लबान में जिले का एकमात्र इंटरचेंज होने और क्षेत्र में चंबल व मेज नदी जैसे जल स्रोत होने से यह क्षेत्र औद्योगिक निवेश के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण कच्चा माल और तैयार उत्पाद आसानी से देश के बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक सुविधाएं और नीतिगत सहयोग मिला तो यह क्षेत्र छोटे और मध्यम उद्योगों का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

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