कृषि उपज मंडी देई ने वर्ष 2025-26 में रेकार्ड पौने तीन करोड रुपए से ज्यादा की आय अर्जित हुई। जानकारी अनुसार इस वित्तीय वर्ष में 2 करोड 86 लाख रुपए की आय हुई। इससे पूर्व मंडी आय सबसे ज्यादा आय वर्ष 2020-21 में रेकार्ड आय 224.82 लाख रुपए रही थी।
देई. कृषि उपज मंडी देई ने वर्ष 2025-26 में रेकार्ड पौने तीन करोड रुपए से ज्यादा की आय अर्जित हुई। जानकारी अनुसार इस वित्तीय वर्ष में 2 करोड 86 लाख रुपए की आय हुई। इससे पूर्व मंडी आय सबसे ज्यादा आय वर्ष 2020-21 में रेकार्ड आय 224.82 लाख रुपए रही थी। वर्ष 2024-25 में आय 197.64 लाख रुपए रही।
कृषि उपज मंडी को पूर्ण मंडी का दर्जा प्राप्त होने के बाद वर्ष 2014-15 में वार्षिक आय 99.39 लाख रुपए थी, जिसने अगले वित्तीय वर्ष 2015-16 में एक करोड़ का आंकडा पार करते हुए 102.62 लाख रुपए की आय अर्जित की थी। अप्रेल व नवम्बर में सबसे ज्यादा आय कृषि उपज मंडी में सबसे ज्यादा आय रबी की फसल की अप्रेल माह व खरीफ की फसल में नवम्बर में होती है।
वर्ष 2025-26 में अप्रेल में 58 लाख 90 हजार, जबकि 2024-25 में 38.10 लाख रुपए रही। नवम्बर माह में वर्ष 2024-25 में 31.03 लाख और 2025-26 में 28.75 लाख रुपए रही। इस बार बरसात ज्यादा होने से खरीब की फसल कम होने से नवम्बर माह में कमी रही।
जिले की दूसरी सबसे बडी मंडी
जिले में बूंदी कुंवारती कृषि उपज मंडी के बाद दूसरी सबसे बडी मंडी देई कृषि उपज मंडी है, जो पूरे वर्ष चलती है और दूसरे स्थान पर आय प्राप्त करती है। मंडी में मुख्यतया उड़द, सोयाबीन, मक्का, सरसों, गेहूं, चना, मसूर, जौ सहित अन्य कृषि जिंसें बिकती है।
मंडी विस्तार की मांग
इसके साथ सीजन में मंडी में माल की अधिक आवक होने पर जगह कम पडने लगती है। और यहां पर पर्याप्त मात्रा में छाया के प्लेटफार्म नहीं होने से मौसम बिगडने पर किसानों की कृषि जिंसें खराब होती है। इसलिए किसानों ने मंडी में नए डोम,प्लेटफार्म निकासी के लिए नया गेट व मंडी की जगह का विस्तार करने या नई जगह पर मंडी निर्माण की मांग रखी है। मंडी व्यापार मंडल महामंत्री लोकेश जिन्दल ने बताया कि मंडी में सबसे बड़ी समस्या जगह की होने लगी है। इसलिए अगर मंडी की जगह बढाने का प्रयास होता है तो ओर ज्यादा राजस्व बढ़ेगा।
तीन जिलों के आते है किसान
मंडी में उपज बेचने के लिए तीन जिलों से किसान यहां पर आते है, जिसमें बूंदी के साथ टोंक, सवाईमाधोपुर जिले के सीमावर्ती गांवो के किसान देई मंडी में माल बेचने आते है। देई मंडी को नकदी मंडी के तौर पर जाना जाता है, जिसके कारण यहां पर आने वाले किसानों को माल बेचने के बाद रुपए के लिए परेशानी नहीं होती है। यहां पर किसानों को नकद रुपए मिल जाते है, जिससे वे अपना माल बेचने आते है।
वर्ष 2025-26 में मंडी में दो करोड 86 लाख रुपए की आय हुई मंडी की आय को कम नहीं होने दिया जाएगा और बढाने के लिए हमेशा प्रयास किया जाएगा।
फतेह सिंह मीना, सचिव, कृषि उपज मंडी
मण्डी में गहराया पेयजल संकट
रामगंजबालाजी. कुंवारती कृषि उपज मंडी में शुक्रवार रात को अचानक बिगड़े मौसम के मिजाज के बाद में यहां पर बिजली गुल हो जाने से जलापूर्ति संकट गहरा गया। यहां पर शनिवार सुबह टंकियों में पानी रीतने के बाद में किसानों मजदूर वर्ग के लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ा। मंडी प्रशासन द्वारा यहां पर पानी की व्यवस्था सुचारु करने के लिए शनिवार को टैंकर लगाकर पानी की टंकियां को भरना शुरू करवाया। दोपहर बाद में पानी की टंकियां भरने के बाद में सभी वर्ग के लोगों को राहत मिली।