जिले में नशा मुक्ति अभियान पर चिकित्सा विभाग की अनदेखी भारी पड़ रही है। गत डेढ़ माह से नशा मुक्ति में काम आने वाली दवाओं की खेप नहीं मिली है। इसकी कई बार मांग भी भेजी गई है। वहीं पीएमओ व सीएमएचओ स्तर से भी दवाओं की खरीद नहीं की गई है।
बूंदी. जिले में नशा मुक्ति अभियान पर चिकित्सा विभाग की अनदेखी भारी पड़ रही है। गत डेढ़ माह से नशा मुक्ति में काम आने वाली दवाओं की खेप नहीं मिली है। इसकी कई बार मांग भी भेजी गई है। वहीं पीएमओ व सीएमएचओ स्तर से भी दवाओं की खरीद नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय स्थित उजाला क्लिनिक में युवाओं को नशे से मुक्ति के लिए काउंसलिंग की जाती है एवं चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवा भी दी जाती है। उजाला क्लिनिक प्रभारी मोनिका स्वामी ने बताया कि प्रतिदिन आठ से दस नए रोगी उजाला क्लिनिक में दवा लेने के लिए आ रहे है, लेकिन दवा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें नशा नहीं करने के बारें में समझा कर लौटाया जा रहा है। जबकि कुछ रोगी तो फिर से वापस सम्पर्क करने भी आते है, लेकिन आपूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें दवा नहीं दी जा रही है।वहीं अब तो ब्रोशर भी खत्म हो चुके है।
बढ़ रहे है रोगी
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 3317 टीबी रोगी चिह्नित किए थे, जिनमें से 486 की स्क्रीनिंग नहीं की गई। वहीं 2026 में मार्च माह तक 828 चिह्नित किए जा चुके है, जिसमें से 320 की स्क्रीनिंग नहीं की गई। वर्ष 2025 में पाए गए टीबी रोगियों में 621 टीबी रोगी तम्बाकू सेवन करने वाले थे, वहीं मार्च 2026 में इनकी संख्या138 दर्ज की गई है।
छह साल से जांच बंद
मोनिका स्वामी ने बताया कि वर्ष 2020 से यहां स्पाइरोमीटर भी बंद पड़ा हुआ है। स्पाइरोमीटर का उपयोग फेफड़ों की कार्यक्षमता को मापने के लिए किया जाता है। यह सांस की मात्रा और गति को मापकर फेफड़ों में हवा के प्रवेश और निकास का आकलन करता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से अस्थमा और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों के निदान और निगरानी के लिए किया जाता है।ऐसे में मरीजों को उनके फेफड़ों की स्थिति के बारे में पता ही लग पाता है।
यह बात सही है कि फरवरी माह से दवाओं की आपूर्ति नहीं हो रही है। दवा की मांग को लेकर कई बार मांग भेजी जा चुकी है। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को भी इस बारे में अवगत कराया जा चुका है।
डॉ. दौलतराम, मनोचिकित्सक एवं नोडल इंचार्ज, उजाला क्लिनिक
फरवरी माह में नए वित्तीय सत्र के लिए टेण्डर किए जा चुके है, लेकिन अभी तक दवाओं की आपूर्ति नहीं हुई है। दवा मिलते ही सभी केन्द्रों पर पहुंचा दी जाएगी।
डॉ. प्रदीप शर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (हेल्थ)