कस्बे में शनिवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रामसागर झील की पाल से सीपेज रोकने की घोषणा के बाद जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों ने शाम को झील पर जाकर सर्वे शुरू कर दिया है, जिसकी रिपोर्ट दो दिन में मुख्यमंत्री कार्यालय भेजेंगे।
हिण्डोली. कस्बे में शनिवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रामसागर झील की पाल से सीपेज रोकने की घोषणा के बाद जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों ने शाम को झील पर जाकर सर्वे शुरू कर दिया है, जिसकी रिपोर्ट दो दिन में मुख्यमंत्री कार्यालय भेजेंगे।
जानकारी अनुसार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यहां आयोजित महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती समारोह में रामसागर झील में सीपेज को सही करवाने की घोषणा की थी, जिस पर तत्काल प्रभाव से जलसंसाधन विभाग के मुख्य अभियन्ता कोटा डीआर. मीना ,अधीक्षण अभियंता महेंद्र कुमार वर्मा ,अधीक्षण अभियंता राणा प्रताप सागर बांध सुनील कुमार गुप्ता, अधिशासी अभियंता रोहित बघेरा एवं सहायक अभियंता एवं कनिष्ठ अभियंता की टीम झील की पाळ का सर्वे करने पहुंच गए।अधिशासी अभियंता बघेरा ने बताया कि मुख्य पाळ जहां पर स्टेट समय पर नदी के ऊपर पाल बनी थी। वहां से पानी का रिसाव हो रहा है। उसका उपचार के लिए प्रस्ताव तैयार कर भिजवाए जाएंगे।ताकि बारिश के एवं वर्ष पर्यंत झील का पानी का रिसाव रोका जा सकेगा। पूर्व कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी की झील के सीपेज रोकने की मांग पर मुख्यमंत्री सभा में दोबारा खड़े होकर घोषणा की थी।
500 बीघा से अधिक कृषि भूमि रहती पड़त
गोठड़ा. रामसागर झील के रिसाव को रोकने एवं सु²ढिक़रण करने की घोषणा के बाद दशकों बाद पांच सौ से अधिक कृषि भूमि पर खेती हो सकेगी। जिससे इस कृषि भूमि पर काश्त कर रहे सैकड़ों किसानों को फायदा मिलने के साथ ही दशकों पुरानी समस्या के स्थायी की उम्मीद है। झील बनने के करीब 30-40 साल बाद पानी का रिसाव शुरू होने लगा। रामसागर झील के नीचे ही रियासत कालीन बाग बना हुआ है। रिसाव का पानी बाग से होते हुए बावड़ा की जमीन से होते हुए ङ्क्षसडोला तक करीब पांच सौ से अधिक कृषि भूमि में से पानी निकलता है।
करीब अस्सी साल पहले रिसाव से हो रहे नुकसान को देखते हुए किसानों ने बाग से लेकर ङ्क्षसडोला तक पानी की उचित निकासी के लिए करीब तीन से चार किमी लंबा कच्चा नाला बनाकर पानी का निकास रामसागर झील के अवरफ्लो नाले में किया गया, लेकिन कच्चा नाला भी किसानों के लिए मददगार साबित नहीं हो पाया। नाला कच्चा होने से कई बार पानी अवरुद्ध होने से रिसाव का पानी नाले तक नहीं पहुंचने के चलते इस बीच पडऩे वाली कृषि भूमि पर बारह माह पानी फैला रहता है। पिछले करीब पच्चीस साल से रामसागर झील के पानी का रिसाव अधिक होने से किसानों को काफी परेशानी हो रही है।
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने किसानों के दर्द को समझा है। जिस पर उन्होंने रामसागर झील के पानी का रिसाव रोकने के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। डीपीआर बनने के बाद रामसागर झील के रिसाव को रोकने के लिए सुरक्षा दीवार,नाले का निर्माण सहित नहरों के सु²ढ़ीकरण के कार्य करवाकर किसानों को राहत पहुंचाई जाएगी।.
प्रभु लाल सैनी,पूर्व कृषि मंत्री।