रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कालदां बफर जोन को बाघों के अनुकूल बनाने की दिशा में वन विभाग ने वैज्ञानिक पद्धति से काम शुरू कर दिया है।
गुढ़ानाथावतान. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कालदां बफर जोन को बाघों के अनुकूल बनाने की दिशा में वन विभाग ने वैज्ञानिक पद्धति से काम शुरू कर दिया है। बूंदी शहर से भीमलत महादेव तक के करीब 300 वर्ग किलोमीटर के जंगलों में शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए वन विभाग ने इस क्षेत्र में पहली बार 200 ट्रेप कैमरे लगाकर निगरानी शुरू कर दी है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की प्रशिक्षित टीम द्वारा टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक अरुण कुमार डी व फील्ड बायलॉजिस्ट नयन उपाध्याय की देखरेख में जंगल में हर दो किलोमीटर में दो-दो ट्रेप कैमरे लगाए गए हैं। कैमरे लगाने का काम लगभग पूरा हो गया है। गौरतलब है कि टाइगर रिजर्व के लिए सारा बजट कोर डीएफओ के पास आता है और कालदां बफर जोन टेरिटोरियल डीएफओ के पास होने से इसे बाघों के अनुकूल बनाने के काम शुरु नहीं हो पा रहे हैं। अब इस क्षेत्र में बाघिन के मूवमेंट से वन विभाग ने इस क्षेत्र को भी बाघों के अनुकूल विकसित करने की शुरुआत की है जो अच्छा कदम सिद्ध होगा।
ट्रेकिंग में वनकार्मिकों को हो रही परेशानी
वन्यजीव और बाघ एक्सपर्ट मानते हैं कि रामगढ़ जो बाघों का सदियों से कॉरिडोर रहा है उसे फिर से बहाल करने की आवश्यकता है। बूंदी में कालदां के जंगल उस कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिसे नजर अंदाज किया जा रहा है। कालदां क्षेत्र में ट्रेकिंग रूट नहीं होने से बाघिन आरवीटी-8 की मॉनिट्रिंग में जुटे वनकर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में जुलिफ्लोरा उन्मूलन व नए ग्रासलैंड बनाने के काम भी शुरू नहीं हो पाए हैं।
आवाजाही बंद कर बढ़ाई चौकसी
बाघिन के इस इलाके में आने से जंगल में लोगों की आवाजाही बंद कर चौकसी बढ़ा दी है। वन विभाग ने कालदां माताजी, देवझर महादेव, दुर्वासा ऋषि महादेव, नारायणपुर, पारा का नाला आदि स्थानों पर श्रद्धालुओं के पैदल जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही बाघिन की नियमित मॉनिट्रिंग के लिए टीमें गठित कर 24 घंटे ट्रेकिंग की जा रही है।
आरवीटी-8 ने बनाया नया ठिकाना
जिले में रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में कालदां के जंगल जैवविविधता के लिहाज से काफी समृद्ध व लोगों की पहुंच से दूर है। इस बियावान एवं सदाबहार जंगल को युवा बाघिन आरवीटी-8 ने अपना नया ठिकाना बना लिया है। बाघिन ने 5 माह से निरंतर इस क्षेत्र में विचरण कर रही है। इस क्षेत्र में देवझर महादेव से भीमलत महादेव तक के जंगल में दो दर्जन से अधिक प्राकृतिक जलस्रोत व पहाड़ी दर्रे हैं। इस क्षेत्र में सदियों से बाघों सहित सभी वन्यजीवों की भी उपस्थिति बनी हुई है।