
रामगंजबालाजी (बूंदी). बूंदी पंचायत समिति में पिछले 16 साल से कांग्रेस का दबदबा कायम है। वर्ष 2010 में पंचायत समिति के गठन के बाद से अब तक हुए तीनों चुनावों में कांग्रेस के प्रधान चुने गए। ऐसे में आगामी 2026 के पंचायत राज चुनाव में भाजपा के सामने कांग्रेस के इस सियासी गढ़ को ढहाने की चुनौती होगी। इस बार प्रधान पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होने से दोनों प्रमुख दलों में दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है। बूंदी पंचायत समिति के गठन के बाद वर्ष 2010 में राजश्री पहली प्रधान चुनी गईं। इसके बाद 2015 में कांग्रेस की मधु वर्मा ने प्रधान पद संभाला। वर्ष 2020 के चुनाव में प्रेम बाई मीणा प्रधान चुनी गईं। इस तरह लगातार तीन चुनावों में कांग्रेस ने पंचायत समिति में अपना वर्चस्व बनाए रखा। अब चौथी बार प्रधान पद पर कब्जे को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं।
पंचायत समिति की राजनीति में पिछले चुनावों से जुड़े परिवार भी चर्चा में हैं। मधु वर्मा प्रधान बनने के बाद वर्ष 2020 में जिला परिषद सदस्य चुनी गईं। वहीं, राजश्री के पति भी वर्ष 2020 में पंचायत समिति सदस्य बने। अब आगामी चुनाव में कौन-कौन से नए चेहरे दावेदारी करते हैं और किस दल को सदस्यों का समर्थन मिलता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
तालेड़ा पंचायत समिति में 61 ग्राम पंचायत की शामिल थी जो जिले की सबसे बड़ी पंचायत समिति थी। वर्ष 2010 में तालेड़ा पंचायत समिति को दो हिस्सों में विभाजित कर दिया गया। 61 में से 30 ग्राम पंचायतें बूंदी में जोडक़र बूंदी पंचायत समिति का गठन किया गया। वहीं तालेड़ा पंचायत समिति में 31 ग्राम पंचायत शामिल की गई।
वर्ष 2010 पंचायतराज चुनाव में बूंदी पंचायत समिति का 15 वार्डों के साथ गठन होने के बाद में यहां पहली बार 8 वार्डों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की। 4 वार्ड पर बीजेपी जीती व 3 वार्ड निर्दलीय ने जीते। उसके बाद में यहां पर कांग्रेस का बोर्ड बना। 2015 के चुनाव में कांग्रेस ने 9 वार्डों में जीत हासिल की। वहीं भाजपा के खाते में 6 वार्ड गए। यहां पर कांग्रेस का बोर्ड बना। 2020 में कांग्रेस को 11 वार्ड में जीत मिली। बीजेपी को यहां पर 4 वार्ड में जीत मिली। तीसरी बार भी कांग्रेस ने जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाई।
इस बार बूंदी पंचायत समिति में प्रधान की सीट ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित है। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा दोनों में संभावित दावेदार पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लडऩे की तैयारी में जुटे हैं। प्रधान पद पर दावेदारी के लिए राजनीतिक समीकरण साधे जा रहे हैं। वर्ष 2010 में सामान्य, 2015 में एससी, 2020 में एसटी वर्ग के प्रधान बने। कांग्रेस के सामने अपना पुराना दबदबा बरकरार रखने की चुनौती है, वहीं भाजपा इस बार पंचायत समिति में सत्ता परिवर्तन कर अपना प्रधान बनाने की रणनीति के साथ मैदान में उतरने की तैयारी में है।