बूंदी

बूंदी जिले में नंदी गोशाला को हरी झंडी

सड़कों पर स्वच्छंद घूमते व लोगों के लिए जी का जंंजाल बने आवारा सांड (नंदी) अब सड़कों पर विचरण करते हुए नजर नहीं आएंगे।
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Sep 29, 2018
Nandi Goshala gets green signal in Bundi district
बूंदी जिले में नंदी गोशाला को हरी झंडी

बैठक में होगा चयन
बूंदी. सड़कों पर स्वच्छंद घूमते व लोगों के लिए जी का जंंजाल बने आवारा सांड (नंदी) अब सड़कों पर विचरण करते हुए नजर नहीं आएंगे। जी हां! बीच सड़क में बैठे सांड व बैल के चलते होने वाली दुर्घटना से जल्द लोगों को राहत मिलेगी। सरकार ने जिले में एक नंदी गोशाला खोलने के आदेश जारी किए हैं। जिसको लेकर पशुपालन विभाग ने प्रकिया शुरू कर दी है।
सड़कों पर खुलेआम घूमते आवारा सांड (नंदी) लोगों के लिए आफत बन चुके हैं। ऐसी कई दुर्घटनाएं हुई जहां सांड लोगों की मौत का कारण बन गए। सरकार ने सड़कों पर बढ़ती हुई संख्या से उत्पन्न हो रही समस्या को देखते हुए प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक नंदी गोशाला खोलने के साथ बजट स्वीकृत किया है। आदेश के बाद विभाग को दो आवेदन प्राप्त हुए। जिसमें से एक पर बैठक में मुहर लगेगी।
हादसे का बन रहे कारण
जिले में बड़ी संख्या में सांडों का आतंक बना हुआ है। कभी ये सांड किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो कभी राहगीरों को घायल कर रहे हैं, यही नहीं इनकी चपेट में आए लोगों की मौत तक हो चुकी है।
बजट निर्धारित
सरकार ने प्रत्येक जिले में एक-एक नंदी गोशाला के लिए प्रति गोशाला ५० लाख रुपए का बजट निर्धारित किया है। जिसमें भी मापदंड निर्धारित किए हंै। इसकी पालना करने वाले गोशाला संचालक को सरकार निर्धारित बजट का ७० प्रतिशत देगी, जबकि ३० प्रतिशत गोशाला संचालक को वहन करना होगा।
यह होगी नंदी में व्यवस्था
राज्यभर में चलने वाली नंदी गोशालाओं के लिए सरकार ने बजट स्वीकृत किया है। इस बजट से मिलने वाली राशि से गोशालाओं में शेड या नरगोवंश आवास निर्माण, चारा भंडार गृह, पानी की खेळ का निर्माण, चारा ठांण निर्माण, पानी की टंकी का निर्माण, गोपालक आवास गृह निर्माण, बाड़े/शेड के अंदर खरंजा निर्माण (खड़ी ईंटों का) व चारदीवारी के लिए तारबंदी का निर्माण कराना होगा।
पंजीकृत हो भूमि
सरकार ने इसके लिए मापदंड रखे हैं कि गोशाला कम से कम २५ बीघा भूमि में होने के साथ पंजीकृत होनी चाहिए। जिसमें इस योजना के लाभार्थी होने वाले गोशाला संचालक को ५०० सांडों (नंदी) के रखने की व्यवस्था करनी है।
& 'नंदी गोशाला खुलने से जिले में (नंदी) नर पशु गोवंश जिनका कोई उपयोग नहीं होने की वजह से पशुपालकों द्वारा आवारा छोड़ दिया जाता है, जिनके पालन पोषण के लिए राज्य सरकार ने नंदी गोशाला स्वीकृत की है। जिससे नंदी गोवंश सुरक्षित रह सकेगा एवं पालन पोषण हो
सकेगा।
डॉ.सी.एल. मीणा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, बूंदी

Published on:
29 Sept 2018 09:05 pm