बूंदी

परिवार को पालने के लिए लगा रहे मौत को गले

सूनगर गांव के पास राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य के प्रतिबंधित क्षेत्र सूनगर गांव के किनारे अवैध बजरी खनन करते समय26मार्च की रात को चंद्रेसल गांव के चार मजदूर मिट्टी में दबने के बाद भी प्रशासन की आंखें नहीं खुली।
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Apr 01, 2019
parivaar ko paalane ke lie laga rahe maut ko gale
परिवार को पालने के लिए लगा रहे मौत को गले

दो वर्ष में16 मजदूर गंवा चुके जान
गरीबों की मौत का द्वार बनी सूनगर की बजरी खदाने : गहरी गुफा बन रही मौत का कारण
केशवरायपाटन. सूनगर गांव के पास राष्ट्रीय चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य के प्रतिबंधित क्षेत्र सूनगर गांव के किनारे अवैध बजरी खनन करते समय26मार्च की रात को चंद्रेसल गांव के चार मजदूर मिट्टी में दबने के बाद भी प्रशासन की आंखें नहीं खुली। पुलिस ने दो बजरी माफियों के खिलाफ मामला दर्ज तो किया, लेकिन अब उन्हें पकडऩे की हिम्मत पुलिस नहीं जुटा पा रही है।
जानकारी के अनुसार परिवार की गरीबी यहां मजदूरों को मौत के मुंह में धकेल रही है। परिवार को पालने के लिए उनके लिए मौत को गले लगाना आम बात हो गई है। बजरी निकालने वाले मजदूरों को अंदाजा नहीं रहता कि कब मौत उनके ऊपर कहर बन टूट पड़ेगी। देखते ही देखते जिंदा मिट्टी में दफन हो जाएंगे।यहां बीते दो साल में 16 जाने चली गई है। दो जिन्दगी मौत से संघर्ष कर रहे हैं। चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य क्षेत्र में सूनगर गांव के पास स्थित बजरी की खदानें मानों यमदूत बन गई है। सूनगर गांव के पास चल रही अवैध बजरी खनन क्षेत्र पहुंची पत्रिका टीम ने देखा तो वहां खुला मौत का खेल दिखाई पड़ा। 50 फीट ऊंचे पहाड़ जैसे टीलों के नीचे दबी बजरी को निकालने के लिए मजदूर दिल थामकर चार से पांच फीट अन्दर घुसकर बजरी निकालते हैं। मजदूरों की मौत पर यहां कुछ दिनों तक प्रशासन सक्रिय होता है फिर वहीं सामान्य स्थिति होने पर खनन शुरू हो जाता है।
परिजन नहीं भूले गम
चम्बल घडियाल अभयारण्य क्षेत्र में सूनगर गांव के पास चम्बल नदी के किनारे अवैध बजरी खनन करते समय मिट्टी के नीचे दबकर मरने वालों के परिजन अभी तक अपनों के बिछुडऩे का गम नहीं भूल पा रहे है। सूनगर के पास बजरी निकालते समय दो वर्ष में 16 जनों की मौत हो चुकी है। 26 मार्च को चन्द्रेसल गांव निवासी महावीर धोबी, सुरेश बैरवा, रामकुमार बैरवा, धनकंवर बैरवा की मिट्टी में दबने से मौत हो चुकी। ग्रामीणों ने बताया कि चम्बल नदी के किनारे से कब मजदूर दबकर मरने की सूचना आए कह नहीं सकते। अधिकांश मजदूरों की रात के समय में बजरी निकलते समय मौत हुई है। सूनगर गांव निवासी बुजूर्ग बहादुर सिंह ने बताया कि दो जने विकलांग होकर बिस्तर पर पड़े हैं।
इनको चाहिए न्याय
वर्ष 2017- 18-19 में 16 मजदूर मिट्टी में दब गए। अपने पास लिखे नामों को बताते हुए ग्रामीण बहादुर सिंह ने कहा कि केशवरायपाट के गोपाल की पत्नी, रंगपुर निवासी कालू लाल केवट, सूनगर निवासी मोहनलाल बैरवा की पत्नी, हरिचंद माली, नन्दा बैरवा के पुत्र वधु शांति बाई, पांच माह पहले छोटूलाल बैरवा की 18 वर्षीय पुत्री, रामहेत केवट का पुत्र, रघुवीर केवट, एक मामा भील, चन्द्रेसल निवासी चार मजदूरों की मृत्यु हो चुकी। 6 माह पहले बजरी निकलते समय इसी गांव निवासी घनश्याम बैरवा मिट्टी में दब गया। उसकी कमर टूटने से वह अभी जिन्दगी व मौत से संघर्ष कर रहा है। कंवरलाल माली जयपुर में उपचार करवा रहा है। अशोक मीणा का जबड़ा टूट गया।
सूनगर में बजरी खनन करते समय मिट्टी के नीचे दबने से श्रमिक मरने के बाद दो जनों के विरुद्ध पुलिस में मामला दर्ज हो चुका है। अब तक वहां कितने मजदूर मरे हैं इसके बारे में जांच करवाई जाएगी। चम्बल घडिय़ाल अभयारण्य विभाग वोट से चम्बल क्षेत्र में निगरानी रखे हुए हंै।
दुर्गाशंकर मीणा, उपखंड अधिकारी, केशवरायपाटन

Published on:
01 Apr 2019 12:21 pm