कृषि मंत्री ने महाविद्यालय को सरकारी दर्जा दिलाने की सरकार से की थी पैरवी की बात
बूंदी /नैनवां. कस्बे के भगवान आदिनाथ जयराज मारवाड़ा महाविद्यालय को सरकारी दर्जा प्रदान करने के लिए विधानसभा व विधानसभा के बाहर तक आवाज भी उठाई गई। उसके बाद भी सरकार महाविद्यालय को सरकारी दर्जा देने में आनाकानी करती आ रही है।
विधायक अशोक चांदना ने कहा कि मामला विधानसभा में उठाया तथा सरकार से जवाब मांगा तो सरकार ने कहा कि महाविद्यालय खोलने के लिए मापदंड निर्धारित कर रखे हैं, जिसके तहत सरकारी महाविद्यालय के लिए आवश्यक भवन होना चाहिए। प्रस्तावित स्थान से 20 किमी की परिधि में कम से कम चार सीनियर सैकण्डरी स्कूल संचालित होना चाहिए।
30 किमी की परिधि में कोई अन्य महाविद्यालय संचालित न हो।
जबकि नैनवां से बीस किमी परिधी मेेंं तीस से अधिक सीनियर सैकण्डरी स्कूल संचालित हो रहे हैं। 6 0 किमी की परिधि तक में दूसरा महाविद्यालय नही है। महाविद्यालय को सरकारी कराने के लिए विधानसभा में भी चार बार मामला उठा चुके हैं।
हर बार यही जवाब आया कि सरकार की मंशा महाविद्यालय को सरकारी करने की नहीं है। 28 जनवरी 2017 को छात्रसंघ शपथ ग्रहण समारोह में आए कृषि मंत्री प्रभूलाल सैनी महाविद्यालय को सरकारी कराने की सरकार से पैरवी करने की बात करके गए थे।
महाविद्यालय को सरकारी कराने के लिए एबीवीपी, एनएसयूआई व ग्रामीण छात्र संगठन भी आन्दोलन कर चुके हैं। आन्दोलन के दौरान भी सिर्फ आश्वासन ही मिला महाविद्यालय सरकारी नहीं हुआ। एबीवीपी द्वारा अगस्त 2016 में किए आन्दोलन को समाप्त कराने के लिए सात अगस्त को महाविद्यालय में आए खाद्यमंत्री बाबूलाल वर्मा भी महाविद्यालय को सरकारी कराने का आश्वासन देकर गए थे।
16 अगस्त 2014 को विधायक अशोक चांदना महाविद्यालय को सरकारी ही रखने की मांग को लेकर एनएसयूआई व ग्रामीण छात्र संगठन के साथ महाविद्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए तो मामला शांत करने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सर्राफ ने उदयपुर में नैनवां से गए भाजपा के शिष्टमण्डल को कॉलेज को सरकारी रखने की बात कही थी। उन्होंने इसकी घोषणा भी की थी, लेकिन घोषणा थोथी साबित हुई और 26 सितम्बर 2014 को वापस स्ववित्तपोषी करने के आदेश जारी कर दिए।