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Bundi : संरक्षण के अभाव में जर्जर हो रही धरोहर

तालेड़ा उपखंड की बाजड़ ग्राम पंचायत के डगलावदा गांव में स्थित लगभग 500 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी संरक्षण के अभाव में बदहाली का शिकार बनी हुई है। समय पर मरम्मत और जीर्णोद्धार नहीं होने से बावड़ी की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं, और घास फूस गए हुए हैं। कई स्थानों से पत्थर उखड़ चुके हैं। बरसात के दिनों में पानी भरने के बावजूद उचित रखरखाव नहीं होने से यह प्राचीन जल स्रोत धीरे-धीरे अपनी ऐतिहासिक पहचान खोता जा रहा है।
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बूंदी

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pankaj joshi

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Updated: 12 Aug 2026, 5:10 PM IST

Bundi : संरक्षण के अभाव में जर्जर हो रही धरोहर

सुवासा. तालेड़ा उपखंड के बाजड पंचायत के डगलावदा गांव की जर्जर अवस्था में प्राचीन बावड़ी जिसे मरम्मत का इंतजार है। पत्रिका

सुवासा. तालेड़ा उपखंड की बाजड़ ग्राम पंचायत के डगलावदा गांव में स्थित लगभग 500 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक बावड़ी संरक्षण के अभाव में बदहाली का शिकार बनी हुई है। समय पर मरम्मत और जीर्णोद्धार नहीं होने से बावड़ी की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं, और घास फूस गए हुए हैं। कई स्थानों से पत्थर उखड़ चुके हैं। बरसात के दिनों में पानी भरने के बावजूद उचित रखरखाव नहीं होने से यह प्राचीन जल स्रोत धीरे-धीरे अपनी ऐतिहासिक पहचान खोता जा रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि यह बावड़ी कभी गांव का प्रमुख जल स्रोत हुआ करती थी और इसका धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व भी रहा है। वर्षों तक ग्रामीण इसी बावड़ी के पानी का उपयोग करते रहे, लेकिन अब उपेक्षा के कारण इसकी संरचना कमजोर पड़ती जा रही है। बावड़ी की छत पर भी गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र मरम्मत कार्य नहीं कराया गया तो यह अमूल्य धरोहर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती है।

उन्होंने प्रशासन, पुरातत्व विभाग तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों से बावड़ी के संरक्षण, सफाई, टूटी दीवारों की मरम्मत, सीढिय़ों के पुनर्निर्माण और परिसर के सौंदर्यीकरण की मांग की है। उनका मानना है कि समय रहते बावड़ी का जीर्णोद्धार कराया जाए तो यह न केवल जल संरक्षण का उपयोगी स्रोत बन सकती है, बल्कि गांव की सांस्कृतिक एवं पर्यटन पहचान को भी नई दिशा मिल सकती है।यहां पर हर वर्ष श्री जी महाराज के मेले का आयोजन होता है। और बावड़ी के पास देवता का स्थान है जहां पर हमेशा श्रद्धालु आते रहते हैं।

मरम्मत के लिए 20 लाख रुपए की जरूरत

पूर्व सरपंच रामलाल मीणा व सतीश मेघवाल ने बताया कि डगलावदा कि इसकी वर्तमान स्थिति जर्जर है और मरम्मत के लिए कम से कम 20 लाख रुपए की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि बीच-बीच में मरम्मत कार्य कराया गया, लेकिन सरकार से पर्याप्त बजट नहीं मिलने के कारण कार्य सही ढंग से नहीं हो पाया। अब बावड़ी की छत और दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र सर्वे कराकर विशेष बजट स्वीकृत करने और व्यापक जीर्णोद्धार कार्य शुरू कराने की मांग की है।

तकनीकी स्वीकृति का इंतजार

बावड़ी के जीर्णोद्धार के लिए चार लाख रुपए की राशि स्वीकृत हुई है। लेकिन अभी तक तकनीकी स्वीकृति जारी नहीं हुई है। स्वीकृति आने पर बावड़ी का मरम्मत का कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
दीपक, ग्राम विकास अधिकारी, बाजड़