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Bundi : अब डिजिटल होगी नन्हों की पहली पाठशाला, 67 हजार बच्चों को मिलेगा फायदा

प्रारंभिक शिक्षा को आधुनिक और आकर्षक बनाने की दिशा में जिले में बड़ा बदलाव हो रहा है। वेदांता ग्रुप की पहल से जिले की विभागीय आंगनबाड़ी केंद्रों का कायाकल्प किया जा रहा है। अब आंगनबाड़ी सिर्फ भोजन और टीकाकरण का केंद्र नहीं रहीं, बल्कि यह डिजिटल लर्निंग की पहली पाठशाला बन गई हैं। जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के 326 विभागीय भवन हैं। इनमें से 300 केंद्रों में काम प्रगति पर है, जबकि 100 आंगनबाड़ियों का काम पूरा हो चुका है।
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बूंदी

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pankaj joshi

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Updated: 7 Aug 2026, 6:04 PM IST

Bundi : अब डिजिटल होगी नन्हों की पहली पाठशाला, 67 हजार बच्चों को मिलेगा फायदा

बूंदी. आंगनबाड़ी केंद्र में टेबल-कुर्सी में पढ़ते बच्चे। पत्रिका

बूंदी. प्रारंभिक शिक्षा को आधुनिक और आकर्षक बनाने की दिशा में जिले में बड़ा बदलाव हो रहा है। वेदांता ग्रुप की पहल से जिले की विभागीय आंगनबाड़ी केंद्रों का कायाकल्प किया जा रहा है। अब आंगनबाड़ी सिर्फ भोजन और टीकाकरण का केंद्र नहीं रहीं, बल्कि यह डिजिटल लर्निंग की पहली पाठशाला बन गई हैं। जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के 326 विभागीय भवन हैं। इनमें से 300 केंद्रों में काम प्रगति पर है, जबकि 100 आंगनबाड़ियों का काम पूरा हो चुका है। प्रत्येक केंद्र पर करीब 1 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

टेबल-कुर्सी पर पढ़ाई

बदले हुए केंद्रों में प्रवेश द्वार से ही आकर्षण शुरू हो जाता है। अंदर बच्चे अब जमीन पर नहीं, बल्कि टेबल-कुर्सी पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। दीवारों पर आकर्षक पेटिंग, रंग-बिरंगे फर्नीचर और साफ-सुथरा माहौल देखकर बच्चे भी खुशी-खुशी आने लगे हैं।

पायलट प्रोजेक्ट

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत डिजिटल शिक्षा है। बाल विकास परियोजना अधिकारी आदित्य सिंह ने बताया कि भारत सरकार ने रॉकेट लर्निंग संस्था के साथ एमओयू किया है। इसके तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और अभिभावकों को बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा के लिए तैयार किया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बूंदी परियोजना के मेघारावत की झोपडिय़ा से शुरुआत की गई है। यहां स्थानीय भाषा में तैयार वीडियो सामग्री के जरिए बच्चों को गतिविधियां सिखाई जा रही हैं। इससे बच्चे अपनी मातृभाषा में आसानी से समझकर सीख सकेंगे।

दीवारें भी अब सिखाएंगी

विभागीय अधिकारियों का मानना है कि बच्चों को सीखने के लिए खुशनुमा माहौल चाहिए। इसी सोच के साथ केंद्रों की दीवारों पर अक्षर, संख्या, फल, जानवर और शैक्षणिक चित्रों की सुंदर पेंङ्क्षटग की गई है। अब बच्चे खेल-खेल में ए से एप्पल और 1 से 10 तक सीखेंगे।

फैक्ट फाइल

योजना का लाभ: आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को
कुल पंजीकृत बच्चे : 67,768
6 माह तक के बच्चे. 5,707
6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चे: 36,607
3 से 6 वर्ष के बच्चे : 25,364

स्थानीय भाषा भी सीखेंगे

नंदघर योजना के तहत हुए एमओयू के तहत जिले में काम तेजी से चल रहा है। विभाग के 326 विभागीय भवनों में से 300 केंद्रों में काम प्रगति पर है। वहीं 100 आंगनबाड़ियों का काम पूरा हो चुका है। बच्चे खेल-खेल में अक्षर ज्ञान के साथ डिजिटल और स्थानीय भाषा भी सीखेंगे।
रिचा चतुर्वेदी, उप निदेशक, महिला बाल विकास, बूंदी