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Bundi News : 32 डिग्री तापमान में धूप के साथ खिसक रहा स्कूल, विभाग भी नहीं दे रहा ध्यान

क्षेत्र में खेड़ली बंधा गांव में राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन शिक्षा विभाग की सर्वे टीम ने एक साल पहले जर्जर घोषित किया गया था। इसके बाद से अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाई है। ऐसे में स्कूल और यही संचालित आंगनबाड़ी केंद्र खूले में पेड़ केे नीचे चल रहा है। स्कूल में 33 बच्चों का नामांकन है।वहीं 14 नन्हे बालक आंगनबाड़ी केंद्र पर आते हैं।
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बूंदी

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Narendra Agarwal

•

Updated: 18 Sep 2026, 12:44 PM IST

the school is shifting along with the sunlight

कापरेन. खेड़ली बंधा का जर्जर राजकीय विद्यालय भवन और खुले परिसर में बैठे नन्हे बालक।

कापरेन. क्षेत्र में खेड़ली बंधा गांव में राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन शिक्षा विभाग की सर्वे टीम ने एक साल पहले जर्जर घोषित किया गया था। इसके बाद से अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो पाई है। ऐसे में स्कूल और यही संचालित आंगनबाड़ी केंद्र खूले में पेड़ केे नीचे चल रहा है। स्कूल में 33 बच्चों का नामांकन है।वहीं 14 नन्हे बालक आंगनबाड़ी केंद्र पर आते हैं। बादल छाने ,तेज अंधड़,और बारिश का मौसम होने पर आंगनबाड़ी केंद्र पर छुट्टी हो जाती है, वहीं स्कूल के बालकों गांव के मन्दिर पर लेकर जाते हैं और अधिक बारिश होने, मौसम खराब रहने पर छुटटी हो रही है।

ऐसे में बारिश के मौसम के दौरान पिछले दो माह में कई बार छुट्टी करनी पड़ी है।गांव में वन विभाग की चौकी खाली पड़ी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से वन विभाग की खाली पड़ी चौकी में वैकल्पिक व्यवस्था कर विद्यालय संचालन के लिए अनुमति दिलाने की मांग की है। साथ ही जल्द विद्यालय भवन का निर्माण करवाने और समस्या से राहत दिलाने की मांग
की है।

पेड़ के नीचे पढ़ाई

ग्रामीणों ने बताया कि मौसम के साथ स्कूल की स्थिति बदलती रहती है।32 डिग्री तापमान में छोटे बालक और आंगनबाड़ी के नन्हे बालक परिसर में पेड़ की छांव के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर है। दिन ढलने के साथ छांव खिसकने के साथ बालक भी खिसकते रहते हैं।सामान्य दिनों में सुबह7 बजे से 9 बजे तक बच्चे खुले परिसर में बैठते हैं और धूप खिलने और तापमान बढऩे पर पेड़ की छांव के नीचे बैठते हैं। दस बजे बाद तापमान बढ़ जाता है, बच्चे छांव के लिए आगे पीछे खिसकते रहते हैं। बारिश का मौसम होने पर मन्दिर पर चले जाते हैं और तेज बारिश में छुट्टी हो जाती है।

चौकी में हो संचालित

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय संचालन के लिए कोई उपयुक्त सार्वजनिक भवन अथवा खाली मकान उपलब्ध नहीं है।ऐसे में वन विभाग की खाली पड़ी वन सुरक्षा चौकी को अस्थायी रूप से विद्यालय संचालन के लिए उपलब्ध करवाने की मांग की गई है। साथ ही वन विभाग से आवश्यक अनुमति दिलवाने का आग्रह किया गया है, अधिकारियों द्वारा इसको अब तक गम्भीरता से नहीं लिया है।

खुले में पकता है पोषाहार

विद्यालय के शिक्षक और आंगनबाड़ी केंद्र प्रभारी का कहना है कि पोषाहार खुले में पकाना पड़ता है। खस्ताहाल भवन होने से बारिश में टपकता है।सामग्री भीगने से बचाने के लिए तिरपाल से ढककर रखते हैं। बच्चों को खुले में पोषाहार करवाना पड़ता है।

तीस वर्ष पुराना है भवन

नवगठित ग्राम पंचायत कोड़क्या के खेड़ली बंधा गांव में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन करीब तीस साल पुराना होने से खस्ता हालत हो चुका है। उपसरपंच कृष्ण मुरारी गोचर ने बताया कि एक साल पहले शिक्षा विभाग की टीम स्कूल भवन के सर्वे पर आई थी। टीम ने भवन का निरीक्षण जर्जर एवं असुरक्षित घोषित कर दिया था ।साथ ही विद्यालय भवन परिसर के अंदर छात्रों और यहां संचालित आंगनबाड़ी केंद्र के बालको को बिठाया जाने पर रोक लगा दी गई थी।विद्यालय भवन पर क्रोस लगाकर भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया है, जिसके बाद से नन्हे विद्यार्थियों के लिए अब तक स्थायी वैकल्पिक भवन की व्यवस्था नहीं हो पाई है। उपसरपंच ने बताया कि भवन असुरक्षित किया जाने के बाद ग्रामीणों ने गांव के बीच बनी हुई वन विभाग के खाली भवन में वैकल्पिक व्यवस्था कर विद्यालय संचालित करने की मांग उठाई पर किसी ने इस ओर ध्यान नही दिया।