बूंदी

पेंशन राशि में लाखों का गबन करने के आरोपी लिपिक को कारावास की सजा

पेंशन राशि में लाखों का गबन करने के मामले में सोमवार को यहां सुनवाई पूरी होने के बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बूंदी जिला कोष कार्यालय के लिपिक सहित तीन जनों को कारावास की सजा सुनाई है।
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Apr 02, 2019
penshan raashi mein laakhon ka gaban karane ke aaropee lipik ko kaaraa
पेंशन राशि में लाखों का गबन करने के आरोपी लिपिक को कारावास की सजा

दो अन्य जनों को भी किया दंडित
बूंदी जिला कोष कार्यालय का मामला
बूंदी. पेंशन राशि में लाखों का गबन करने के मामले में सोमवार को यहां सुनवाई पूरी होने के बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बूंदी जिला कोष कार्यालय के लिपिक सहित तीन जनों को कारावास की सजा सुनाई है।
जानकारी के अनुसार सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत वृद्धजनों को मिलने वाली पेंशन राशि को संबंधित लोगों के खातों में नहीं डालकर अपने परिचितों के खातों में जमा कराता रहा।इन पैसोंं का बाद में आपस में बंटवारा करते रहे। ऐसे में दूसरों के खाते में राशि हस्तांतरित कर राजकीय राशि का गबन करते रहे।जो बाद में लाखों रुपए निकला। जिला कोषाधिकारी की ओर से सौंपी रिपोर्ट पर1 सितम्बर 2016 को तीन जनों के खिलाफ बूंदी के सदर थाने में अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया। उक्त प्रकरण की सुनवाई पूरी होने के बाद सोमवार को न्यायालय ने पीपल्या निवासी कोष कार्यालय के लिपिक मनोज कुमार प्रजापत को पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। वहीं राजपुरा (दबलाना) निवासी बनवारी व देई निवासी चेतराम को 3-3 साल की सजा सुनाई है।
यूं रचा था षडयंत्र
पहले तो दो परिचितों को पेंशनर्स बनाया फिर उनके बैंक खाते में राशि जमा करता रहा। यही नहीं जिन खातों में राशि जमा होती रही, उसे खाता धारक निकालते भी रहे। यह रकम लाखों में पहुंच गई। प्रथम दृष्टया इस खेल के लिए जिला कोषाधिकारी कार्यालय में कार्यरत लिपिक को जिम्मेदार ठहराया गया। जांच के बाद तत्कालीन जिला कोषाधिकारी महेशचंद मीणा की रिपोर्ट पर सदर थाना पुलिस ने लिपिक व दो अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, गलत ट्रांजेक्शन, आपराधिक षडयंत्र एवं रिकॉर्ड में हेरफेर का मामला दर्ज किया।
23खातों में डाले लाखों
विस्तृत जांच में सामने आया था कि उक्त आरोपी लिपिक ने 23जनों के खातों में 31 लाख 97हजार 750रुपए डाले थे।कोषाधिकारी ने इस मामले में 31अगस्त 2016 को पुलिस अधीक्षक को परिवाद सौंपा, जिस पर १ सितम्बर को थाने में प्रकरण दर्ज किया गया।14 मार्च 2017 को जिला कलक्टर ने लिपिक को सेवा से बर्खास्त कर दिया था।

Updated on:
02 Apr 2019 01:33 pm
Published on:
02 Apr 2019 01:33 pm