
बूंदी. परिवहन विभाग की ओर से बनने वाले वाहन चालक व परिचालक लाइसेंस की पुलिस वेरीफिकेशन की बाध्यता को सराकर ने खत्म कर दिया है। पूर्व में पुलिस चरित्र सत्यापन के बिना अनुज्ञाधारियों को लाइसेंस जारी नहीं होते थे। इस बाबत परिवहन आयुक्त ने प्रदेश के सभी जिला परिवहन अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं।
परिवहन विभाग की ओर से जारी किए जाने वाले वाहन चालक लाइसेंस के साथ लाइसेंस धारक को वाहन चलाने का अधिकार राजस्थान मोटरयान नियम 1990 के नियम 22 एवं 2.26 में स्पष्ट आदेश होने के बाद भी कई अनुज्ञापत्र अधिकारियों द्वारा प्रावधानों की पालना नहीं करने से केवल परिवहन (टीवी) श्रेणी का वाहन लाइसेंस जारी किया जाता था।
जिसके चलते वाहन दुर्घटना व अन्य प्रकरणों में वाहन स्वामी व चालक को बीमा क्लेम आदि कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं प्रावधानों की पालना के अभाव में चालकों के चरित्र सत्यापन नहीं होने से आपराधिक प्रवृति के व्यक्ति भी परिवहन श्रेणी के वाहन लाइसेंस प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं।
नहीं चला पाते थे वाहन
पुुलिस सत्यापन के चलते पूर्व में आपराधिक व मुकदमे धारी व्यक्ति वाहन चलाने से कतराते थे। पुलिस रिकॉर्ड में संबंधित के नाम की फाइल होने से इन श्रेणियों के लोग लाइसेंस बनवाने के साथ वाहन नहीं चला पा सकते थे। लेकिन सरकार ने इसकी बाध्यता को अब खत्म कर दिया है।
ई-मित्र में हो जाती पुलिस सत्यापन
लाइसेंस बनाने के लिए संबंधित व्यक्ति ई-मित्र में आवेदन करता है। सभी डाक्यूमेंट जमा होने के बाद यहां से सारा कार्य शुरू हो जाता था। पुलिस सत्यापन भी ई-मित्र के माध्यम से हो जाता है। इसके बाद पुलिस संबंधित का लाइसेंस ई-मित्र पर डाल देते हैं।
वाहन चालक व परिचालक लाइसेंस की पुलिस वेरीफिकेशन की बाध्यता को सराकर ने हटा दिया है। परिवहन आयुक्त ने इस बाबत आदेश जारी किए हैं। पूर्व में पुलिस चरित्र सत्यापन के बिना लाइसेंंस जारी नहीं होते थे, जिसको अब सरकार ने खत्म कर दिया है।
धर्मपाल आसीवाल, जिला परिवहन अधिकारी, बूंदी