एनएच-148डी व स्टेट हाइवे-34 पर कोई दुर्घटना होती है तो उनको उपचार पर्ची के साथ ही रेफर टिकट तैयार हो जाता है।
नैनवां. एनएच-148डी व स्टेट हाइवे-34 पर कोई दुर्घटना होती है तो उनको उपचार पर्ची के साथ ही रेफर टिकट तैयार हो जाता है। दोनों हाइवे पर घायलों के त्वरित उपचार के लिए नैनवां उपखण्ड मुख्यालय उपजिला चिकित्सालय व ट्रॉमा सेंटर की स्थापना तो कर रखी है, लेकिन चिकित्सक लगे हुए नहीं है। दोनों हाइवे रोजाना दो से तीन दुर्घटनाएं हो रही है। उपचार के लिए घायलों को जैसे ही अस्पताल में पहुंचाया जाता है तो प्राथमिक उपचार के साथ ही रेफर टिकट पकड़ा दिया जाता है। तत्काल उचित उपचार नहीं हो पाने से कई बार तो घायलों का उच्च चिकित्सा संस्थानों में पहुंचने से पहले दम टूट जाता है।
दोनों ही हाइवे पर घायलों के त्वरित उपचार के लिए 70 किमी तक कोई उच्च चिकित्सा संस्थान नहीं है। एनएच148 डी व स्टेट हाइवे 34 पर बूंदी या टोंक जिला अस्पताल 70 किमी दूर पड़ते है। दोनों हाइवे पर टोंक जिले के पलाई से बूंदी जिले के गोठड़ा तक के देई से लेकर टोंक जिले के नगरफोर्ट के बीच दुर्घटनाओं में घायल सबसे पहले उपचार के लिए नैनवां उपजिला चिकित्सालय या ट्रॉमा सेंटर पर ही पहुंचते है।
इन गांवों का उपचार केंद्र
उपजिला चिकित्सालय व ट्रॉमा सेंटर बनने के बाद से ही नैनवां शहर व नैनवां तहसील ही नहीं नैनवां के समीप स्थित टोंक जिले की नगरफोर्ट, दूनी, उनियारा तहसीलों के 50 से गांवों से भी मरीज उपचार के लिए आते है। नैनवां तहसील साथ ही टोंक जिले के पचास से अधिक ऐसे गांव है जिनसे नैनवां की दूरी 10 से 20 किमी ही पड़ती है। बड़ोली, भानौली, बालुन्दा, स्यावता, ठिकरिया, बालुन्दा, सतवाड़ा, चन्दवाड़, गुराई, खेड़ा, जेल, रघुराजपुरा, देवपुरा, नगरफोर्ट, खातोल, देवरी, बालापुरा, मुगलाना, जालिमगंज, बोसरिया, समरावता, कचरावता, रायपुरा, पलाई, महाराजपुरा, चतरपूरा तो ऐसे गांव है। नैनवां से 15 किमी की परिधि में ही बसे हुए है। नैनवां तहसील के जरखोदा, समिधी, बालापुरा, नाहरगंज, जगदीशपुरा, गम्भीरा, रामपुरिया, खासपुरिया, बामनगांव, करीरी, हीरापुर, संडीला, बम्बूली, रजलावता, खेरुणा, भोमपुरा आदि गांव ऐसे है जिनका भी उपचार का केंद्र है।