बूंदी

बूंदी के अमरूदोंं का स्वाद हर जुबान पर, आकार और मिठास से देशभर में पहचान

छोटी काशी बूंदी की उपजाऊ माटी में तैयार हो रहे अमरूद अब अपनी मिठास और आकर्षक आकार के कारण देशभर में पहचान बना रहे हैं। यहां के अमरूदों का स्वाद हर जुबान पर घुल रहा है। बेहतर ठंड और नमी के कारण इस वर्ष अमरूद की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे न केवल किसान खुश हैं, बल्कि बाजार में भी अमरूदों की मांग लगातार बढ़ रही है।

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Dec 30, 2025
बूंदी. शहर के निकट एक खेत में अमरुदों की पेकिंग करते हुए।

बूंदी. छोटी काशी बूंदी की उपजाऊ माटी में तैयार हो रहे अमरूद अब अपनी मिठास और आकर्षक आकार के कारण देशभर में पहचान बना रहे हैं। यहां के अमरूदों का स्वाद हर जुबान पर घुल रहा है। बेहतर ठंड और नमी के कारण इस वर्ष अमरूद की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे न केवल किसान खुश हैं, बल्कि बाजार में भी अमरूदों की मांग लगातार बढ़ रही है।

किसानों को हो रहे अच्छे मुनाफे के चलते जिले में अमरूद की बागवानी की ओर रुझान तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2025 में अमरूद के बगीचों का रकबा बढक़र 415 हैक्टेयर तक पहुंच गया है, वहीं उत्पादन करीब 5 हजार मीट्रिक टन दर्ज किया गया है।
कृषि अधिकारियों के अनुसार हर वर्ष उत्पादन में वृद्धि हो रही है। नवंबर माह से अमरूद की तुड़ाई शुरू हो जाती है, जो 15 जनवरी तक चलती है। जुलाई में फल लगना शुरू होता है और मार्च तक तुड़ाई का कार्य जारी रहता है।

हाईटेक हो रही अमरूद की खेती
अब अमरूद की खेती भी हाईटेक होती जा रही है। किसान सीधे ठेकेदारों को बगीचे बेच देते हैं, जो स्वयं तुड़ाई और विपणन का कार्य करते हैं। कई बगीचों में पैकिंग का कार्य भी शुरू हो चुका है। वर्ष 2005 से पहले बूंदी के अमरूद प्रदेश में पहले स्थान पर थे। मौसम की प्रतिकूलता के कारण कुछ समय गिरावट आई, लेकिन अब फिर से किसानों का भरोसा लौट रहा है।

आकार और मिठास बनी पहचान
बागवानी करने वाले किसान रघुवीर सैनी और महावीर सैनी बताते हैं कि अमरूद का बड़ा आकार देखकर ही ग्राहक आकर्षित हो जाते हैं। ठंड के मौसम में फल में विशेष मिठास आ जाती है। राजस्थान में अमरूद किलो के भाव बिकता है, जबकि अन्य राज्यों और नेपाल में एक-एक अमरूद के हिसाब से बिक्री होती है।

75 प्रतिशत तक मिल रहा अनुदान
कृषि विभाग के अनुसार किसानों को रजिस्टर्ड नर्सरी से पौधे लेने पर सरकार द्वारा 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। ड्रिप ङ्क्षसचाई और तकनीकी मार्गदर्शन से किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।

जिले में अमरूद एक महत्वपूर्ण बागवानी फसल है। उपयुक्त जलवायु और मृदा के कारण गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हो रहा है। उद्यानिकी विभाग द्वारा पौधरोपण, ड्रिप ङ्क्षसचाई और तकनीकी सहयोग से किसानों की आय बढ़ी है। वर्ष 2025 में अमरूद का रकबा 415 हैक्टेयर तक पहुंच गया है और उत्पादन लगभग 5 हजार मीट्रिक टन हुआ है।
सीताराम मीणा, कृषि अधिकारी, उद्यान विभाग, बूंदी

Published on:
30 Dec 2025 11:46 am
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