Adani-Embraer Deal: भारत में जल्द ही पैसेंजर प्लेन मैन्यूफैक्चर हो सकते हैं। अडानी ग्रुप ने ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर के साथ छोटे और मध्यम दूरी के प्लेन बनाने के लिए डील की है।
Adani-Embraer Deal: जल्द ही भारत में भी प्लेन मैन्यूफैक्चर होंगे। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा, जहां पैसेंजर प्लेन बनाए जाते हैं। भारत में प्लेन अडानी ग्रुप बनाएगा। अडानी ग्रुप ने छोटे और मध्यम दूरी के विमान मैन्यूफैक्चर करने के लिए ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर के साथ डील की है। बता दें कि भारत दुनिया का सबसे फास्ट ग्रोथ कर रहा एविएशन मार्केट है। भारत अभी अपनी जरूरत के लिए विमान विदेशों से मंगवाता है। भारतीय एयरलाइन कंपनियों ने विदेशी कंपनियों को 1800 से अधिक हवाई जहाजों के लिए ऑर्डर दिये हुए हैं।
अडानी ग्रुप और एम्ब्रेयर के बीच यह डील मेक इन इंडिया प्रोग्राम में बड़ी सक्सेस मानी जा रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, अडानी एयरोस्पेस ने ब्राजील में एम्ब्रेयर के साथ फाइनल असेंबली लाइन के लिए एमओयू साइन किया है। जिन विमानों के लिए डील हुई है, उनमें 70 से 146 पैसेंजर्स बैठ सकते हैं। हालांकि, अडानी या एम्ब्रेयर की तरफ से अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
उम्मीद की जा रही है कि इस महीने हैदराबाद में होने वाले एयर शो में अडानी ग्रुप इस डील की औपचारिक घोषणा कर सकता है। इससे यह भी पता चल जाएगा कि फाइनल असेंबली लाइन कहां बनेगी, कितना निवेश होगा और यह कब तक परिचालन शुरू कर देगी।
भारत सरकार चाहती हैं कि विदेशी कंपनियां भारत में अपनी असेंबली लाइन डालें। सरकार चाहती है कि भारत में हवाई जहाज बनाने का पूरा इको सिस्टम तैयार हो। अडानी एम्ब्रेयर डील से एयरबस और बोइंग जैसी कंपनियां भी भारत में असेंबली लाइन लगाने के लिए आकर्षित होंगी।
शुरुआत में उन ग्राहकों को डिस्काउंट या इंसेंटिव देने की योजना है, जो भारत में बनने वाले कमर्शियल एयरक्राफ्ट खरीदेंगे। जैसे-जैसे ऑर्डर बढ़ेंगे, वैसे-वैसे इंसेंटिव को धीरे-धीरे कम किया जाएगा।
भारत में अम्ब्रेयर के हवाई जहाजों का पहले से ही इस्तेमाल हो रहा है। कमर्शियल, डिफेंस और बिजनेस एविएशन में कंपनी के करीब 50 विमान यूज हो रहे हैं। इस समय स्टार एयर एम्ब्रेयर के हवाई जहाजों का यूज करती है। एंब्रेयर को भारत से और ऑर्डर मिल सकते हैं, क्योंकि एयरबस और बोइंग के पास डिमांड का भारी दबाव है। इन कंपनियों को नए ऑर्डर देने पर अगले दशक के मध्य तक भी डिलीवरी मिलना मुश्किल है। वहीं, भारत 80 से 146 सीटों वाले हवाई जहाजों के लिए एक काफी बड़ा मार्केट है। अगले 20 वर्षों में भारत को ऐसे 500 हवाई जहाजों की जरूरत होगी।