
Bank Locker Theft Compensation: बैंक लॉकर को लोग घर में कीमती सामान रखने से ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। लेकिन गुजरात के जामनगर में सामने आए एक मामले ने बैंक लॉकर की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक बैंक लॉकर में रखे करीब 39.48 लाख रुपये के सोने के गहनों को नकली गहनों से बदल दिया गया। मामला तब सामने आया जब जामनगर पुलिस ने 3 सितंबर को इंडियन बैंक की रंजीतसागर रोड शाखा को सूचना दी कि बैंक के लॉकर से लाखों रुपये का सोना चोरी होने की आशंका है। बैंक अधिकारियों के लिए यह किसी झटके से कम नहीं था, क्योंकि लॉकर वाले वॉल्ट को खोलने के लिए दो चाबियों की जरूरत होती है।
जांच हुई तो पता चला कि गहने अपनी जगह पर तो रखे थे, लेकिन असली नहीं थे। बैंक ने जब अपने ज्वेलर से लॉकर में रखे गहनों की जांच कराई तो पूरा मामला खुल गया। मंगलसूत्र, हार, अंगूठियां, झुमके और पेंडेंट समेत कुल 342.10 ग्राम सोने के गहने लॉकर में रखे थे। लेकिन जांच में पता चला कि असली गहनों की जगह नकली गहने रख दिए गए थे। FIR के मुताबिक, बैंक के चपरासी हसमुख दिनेश परिया ने वॉल्ट की चाबियां हासिल कीं और करीब 39.48 लाख रुपये के सोने के गहने निकालकर उनकी जगह नकली गहने रख दिए।
बैंक के नियम के मुताबिक वॉल्ट खोलने के लिए दो चाबियों की जरूरत थी। ये दोनों चाबियां दो अलग-अलग अधिकारियों के पास रहती थीं। जामनगर ए डिवीजन पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर वीएम डोडिया के मुताबिक, एक चाबी ब्रांच मैनेजर और दूसरी डिप्टी के पास रहती थी। लेकिन जिस दिन यह घटना हुई, डिप्टी छुट्टी पर थे। ऐसे में दोनों चाबियां ब्रांच मैनेजर के पास थीं। पुलिस का कहना है कि बैंक में करीब 15 साल से काम कर रहा चपरासी इस व्यवस्था से परिचित था। उसे पता था कि डिप्टी के छुट्टी पर होने की स्थिति में दोनों चाबियां एक ही अधिकारी के पास रहेंगी। यही मौका कथित तौर पर चोरी के लिए इस्तेमाल किया गया।
बैंक लॉकर से गहने गायब होने का यह अकेला मामला नहीं है। अलग-अलग शहरों में पहले भी ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं। दिल्ली के कीर्ति नगर में एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसके बैंक लॉकर से करीब 60 लाख रुपये के गहने गायब हो गए। लखनऊ में एक बैंक की शाखा में चार लॉकर कथित तौर पर तोड़ दिए गए और करीब 48 लाख रुपये के सोने के गहनों के गबन का मामला सामने आया। फरीदाबाद में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और उसके परिवार ने बैंक शाखा पर लॉकर की देखरेख में लापरवाही का आरोप लगाया था। उनके मुताबिक, करीब एक किलो सोने और तीन किलो चांदी के गहने लॉकर से गायब मिले। लखनऊ में ही इस साल एक अन्य मामले में बैंक के लॉकर से करीब 1.5 करोड़ रुपये के गहने चोरी होने का आरोप लगाया गया था। ग्राहक ने बैंक कर्मचारियों पर चोरी का आरोप लगाया था।
यहां सबसे जरूरी बात समझना जरूरी है। बैंक लॉकर लेने का मतलब यह नहीं है कि लॉकर में रखा हर सामान पूरी तरह बैंक की जिम्मेदारी है। सेबी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और सहज मनी के संस्थापक अभिषेक कुमार के मुताबिक, घर में कीमती सामान रखने की तुलना में बैंक लॉकर निश्चित रूप से सुरक्षा देता है। लेकिन ग्राहक को यह भी समझना चाहिए कि बैंक लॉकर के अंदर रखी हर चीज का बीमा बैंक नहीं करता। आरबीआई के संशोधित लॉकर नियमों के तहत कुछ परिस्थितियों में बैंक की जिम्मेदारी तय की गई है, लेकिन इसकी एक सीमा है।
अगर लॉकर में रखे सामान को बैंक की लापरवाही, आग, चोरी या बैंक कर्मचारी की धोखाधड़ी जैसी स्थिति के कारण नुकसान होता है, तो ग्राहक को मुआवजा मिल सकता है। लेकिन यहां एक पेंच है। बैंक की देनदारी लॉकर के सालाना किराये की 100 गुना राशि तक सीमित है। मान लीजिए किसी ग्राहक के लॉकर का सालाना किराया 5,000 रुपये है, तो इस नियम के तहत बैंक की अधिकतम देनदारी 5 लाख रुपये होगी। भले ही लॉकर में इससे कहीं ज्यादा कीमत का सामान रखा हो। इसलिए लॉकर में 50 लाख या 1 करोड़ रुपये का सोना रखने का मतलब यह नहीं है कि चोरी होने पर बैंक उतनी ही पूरी रकम वापस करेगा।
प्राकृतिक आपदा के मामले में नियम अलग हैं। बाढ़, भूकंप या इसी तरह की घटनाओं से लॉकर में रखा सामान खराब या नष्ट होने पर बैंक आमतौर पर जिम्मेदार नहीं होता, बशर्ते बैंक ने अपनी तरफ से तय सुरक्षा नियमों का पालन किया हो। यही वजह है कि ग्राहक के लिए लॉकर के नियमों और बैंक के साथ किए गए एग्रीमेंट को समझना बेहद जरूरी है।
लॉकर के मामले में एक बड़ी समस्या यह है कि बैंक को आमतौर पर यह जानकारी नहीं होती कि ग्राहक ने अंदर क्या रखा है। किसी लॉकर में 5 लाख रुपये के गहने हैं या 50 लाख रुपये के, बैंक के पास इसकी पूरी सूची नहीं होती। ऐसे में चोरी या नुकसान होने के बाद ग्राहक को अपने सामान और उसकी कीमत साबित करने में परेशानी हो सकती है। इसके लिए खरीद की रसीद, गहनों की तस्वीरें और प्रमाणित ज्वेलर का वैल्यूएशन सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज काफी काम आ सकते हैं।
नहीं। लॉकर में रखे सामान का सामान्य तौर पर बैंक की तरफ से बीमा नहीं किया जाता। अभिषेक कुमार के मुताबिक, लॉकर में रखे सामान के लिए बैंक खुद बीमा उत्पाद उपलब्ध नहीं करा सकते। ऐसे में ग्राहक को यह भ्रम नहीं रखना चाहिए कि लॉकर लेने के साथ उसमें रखे सोने और दूसरे कीमती सामान का पूरा बीमा भी हो गया है। जो मुआवजा बैंक की लापरवाही के मामले में मिलता है, वह सामान की पूरी कीमत की भरपाई नहीं, बल्कि नियमों के तहत बैंक की सीमित जिम्मेदारी से जुड़ा भुगतान है।
कुछ खास परिस्थितियों में बैंक को लॉकर खोलने का अधिकार होता है। यह अधिकार ग्राहक के साथ किए गए लॉकर एग्रीमेंट की शर्तों के तहत इस्तेमाल किया जा सकता है। मसलन, अगर ग्राहक को लॉकर खाली करने का नोटिस दिया गया है और नोटिस की अवधि खत्म होने के बाद भी वह लॉकर खाली नहीं करता, तो बैंक आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इसके अलावा अगर लॉकर का किराया लगातार तीन साल तक नहीं दिया गया है, तब भी बैंक कार्रवाई कर सकता है। एक और स्थिति तब बनती है जब लॉकर सात साल या उससे ज्यादा समय तक इस्तेमाल नहीं किया गया हो और बैंक ग्राहक का पता लगाने में असमर्थ हो। ऐसी स्थिति में भी नियमों के मुताबिक बैंक लॉकर खोल सकता है और उसके अंदर रखे सामान के संबंध में आगे की प्रक्रिया अपना सकता है।
आरबीआई ने साल 2022 से बैंक लॉकर से जुड़े नियमों में कई बदलाव किए। नए नियमों के तहत बैंकिंग सिस्टम में सुरक्षा और रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। बैंकों को लॉकर से जुड़े हर ऑपरेशन पर SMS और ईमेल अलर्ट की व्यवस्था करनी होती है। इसके अलावा CCTV फुटेज को 180 दिनों तक सुरक्षित रखने और इलेक्ट्रॉनिक लॉकर के लिए साइबर सुरक्षा के तय मानकों का पालन करने जैसे प्रावधान भी हैं।