HAL share price target: ईरान युद्ध शुरू होने के पांच हफ्ते बाद भी सीजफायर नहीं हुआ है। रूस-यूक्रेन में तनाव और चीन-ताइवान संघर्ष शुरू होने की आशंका के बीच विशेषज्ञों ने डिफेंस शेयरों में निवेश की सलाह दी।
Defence Stocks Price Targets: ईरान ने ट्रंप की 15 सूत्री योजना ठुकरा दी है। रूस यूक्रेन पर और आक्रामक हो गया है। साथ ही जानकार कह रहे हैं कि चीन भी ताइवान पर नजर गड़ाए बैठा है। ईरान जंग को पांच हफ्ते से ज़्यादा हो गए हैं और सीजफायर की कोई सूरत नहीं दिख रही। ऐसे माहौल में एक सेक्टर है जो फायदे में रह सकता है। वह है डिफेंस सेक्टर। Basav Capital के सह-संस्थापक संदीप पांडे कहते हैं कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव में अगर चीन ताइवान पर हमला करे तो हैरानी नहीं होगी। उनकी सलाह है कि लंबे समय के निवेशक डिफेंस शेयर अभी पोर्टफोलियो में जोड़ सकते हैं। खासकर वो कंपनियां जो ड्रोन, मिसाइल और एयरोस्पेस उपकरण बनाती हैं।
SMC Global Securities की वरिष्ठ विश्लेषक सीमा श्रीवास्तव बताती हैं कि भारत ने हाल में जर्मनी, फ्रांस, EU और इज़राइल के साथ कई बड़े रक्षा सौदे किए हैं। 22 Apache अटैक हेलीकॉप्टर और 15 Chinook हेवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टर बोइंग से खरीदने की योजना है। फ्रांस से 26 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा भी है।
FY26-27 में भारत का रक्षा बजट 15.2 फीसदी बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। Defence Acquisition Council ने पिछले हफ्ते 2.38 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनमें S-400 मिसाइल सिस्टम भी शामिल है। मजेदार बात यह है कि इतने सब के बावजूद कई डिफेंस शेयर 52 हफ्ते के निचले स्तर के पास हैं। यानी खरीदारी का मौका हो सकता है।
दुनिया में जब बारूद की गंध हो, तो डिफेंस कंपनियों के कारखाने रात-दिन चलते हैं। बाजार को यह समझने में थोड़ा वक्त लगता है, लेकिन जब लगता है तो इन शेयरों में तेजी आती है।