Silver Hallmarking: चांदी के छोटे सिक्कों की मार्केट में काफी डिमांड है। युवा निवेशक इन छोटे सिक्कों को आसान निवेश, कम लागत और बेहतर लिक्विडिटी के कारण पसंद कर रहे हैं।
Silver Hallmarking: महंगे होते सोने-चांदी के बीच भारत में निवेश और खरीदारी का तरीका तेजी से बदल रहा है। निवेशक अब माइक्रो गोल्ड कॉइन्स जैसे छोटे विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे कम रकम में भी सुरक्षित निवेश संभव हो पा रहा है। वहीं, चांदी की कीमतों में तेजी और बढ़ती मांग के बीच सरकार चांदी के आभूषणों और कलाकृतियों पर अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे को बढ़ाने पर विचार कर रही है, ताकि उपभोक्ताओं को शुद्धता और भरोसे की गारंटी मिल सके। फिलहाल चांदी पर हॉलमार्किंग स्वैच्छिक आधार पर की जाती है, जबकि सोने के लिए यह पहले से ही अनिवार्य है। अब सभी तरह की चांदी के लिए हॉलमार्किंग जरूरी हो सकती है।
इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, माइक्रो गोल्ड कॉइन्स अब कुल गोल्ड कॉइन बिक्री का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा बन चुके हैं। 0.1 ग्राम और 0.5 ग्राम के छोटे गोल्ड कॉइन्स की मांग दिवाली के बाद से लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि युवा निवेशक इन छोटे सिक्कों को आसान निवेश, कम लागत और बेहतर लिक्विडिटी के कारण पसंद कर रहे हैं। बीते एक साल में सोने की कीमतों में 70% से अधिक तो चांदी में 170% की तेजी आई है। इससे जेन जी निवेशकों में माइक्रो गोल्ड के साथ-साथ 1 से 2 ग्राम के सिल्वर कॉइन्स की मांग भी बढ़ी है। सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने से इनके भारी गहनों की मांग में 30 से 40 फीसदी तक की गिरावट आई है।
बीआईएस के महानिदेशक संजय गर्ग ने कहा कि इंडस्ट्री की ओर से चांदी पर भी अनिवार्य हॉलमार्किंग की मांग की जा रही है। हालांकि, इसे लागू करने से पहले बीआइएस को नियामकीय ढांचे का आकलन करना होगा। इसमें परीक्षण क्षमता अस्सेइंग मानक और लैब नेटवर्क जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। वर्तमान स्वैच्छिक व्यवस्था के तहत, यदि किसी चांदी के
आभूषण या वस्तु पर हॉलमार्क लगाया जाता है तो उस पर हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (एचयूआइडी) नंबर होना अनिवार्य है। स्वैच्छिक हॉलमार्किंग के आंकड़ों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। 2024 में जहां 31 लाख चांदी की वस्तुओं पर हॉलमार्क किया गया था। वहीं, 2025 में यह संख्या बढ़कर 51 लाख तक पहुंच गई है।
निवेश विशेषज्ञों के अनुसार, माइक्रो गोल्ड कॉइन्स की सबसे बड़ी खासियत उनकी लिक्विडिटी है। जरूरत पड़ने पर इन्हें आसानी से बेचा जा सकता है। साथ ही, छोटी मात्रा में नियमित खरीद से निवेशक लंबी अवधि में अच्छा गोल्ड पोर्टफोलियो बना सकते हैं। विशेषज्ञों की राय है कि आगे चलकर भी माइक्रो गोल्ड कॉइन्स का ट्रेंड जारी रहेगा। हालांकि, निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए चरणबद्ध निवेश करें और मुनाफा मिलने पर आंशिक बुकिंग से भी न हिचकें।