फूड रेगुलेटर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अपने ताजा आदेश में साफ करा है कि प्लांट बेस प्रोडक्ट खुद को मिल्क नहीं कह सकते।
नई दिल्ली। फूड रेगुलेटर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई (FSSAI) ने प्लांट बेस प्रोडक्ट को मिल्क के वर्ग में रखने पर विरोध जताया है। FSSAI ने अपने ताजा आदेश में साफ करा है कि प्लांट बेस प्रोडक्ट खुद को मिल्क नहीं कह सकते।
एफएसएसएआई के आदेश बाद सोया मिल्क, बादाम मिल्क या ओट मिल्क बेचने वाले ब्रांड्स को मिल्क (Milk) शब्द को हटाना पड़ेगा। इसके साथ ई-कॉमर्स कंपनियों से कहा गया है कि वे तुरंत प्रभाव से ऐसे प्रोडक्ट्स को अपने पोर्टल से हटा ले जो प्लांट बेस होने के बाद भी मिल्क कहते हैं या डेयरी के अन्य शब्दों का उपयोग करते हैं।
आदेश के अनुसार मिल्क या डेयरी के अन्य प्रोडक्ट्स का उपयोग सिर्फ उन प्रोडक्ट्स के लिए होगा, जो जानवरों से आते हों। अगर वनस्पतियों से आने वाले प्रोडक्ट के लिए मिल्क शब्द का उपयोग होने लगे तो ये मिस ब्रांडिंग का मामला होगा।
लेबलिंग की जांच करने का निर्देश
ई-कॉमर्स कंपनियों को आदेश दिए गए हैं कि मिल्क लेबल के साथ प्लांट प्रोडक्ट्स को न बेचा जाए। एफएसएसएआई ने राज्य के फूड कमिश्नरों, फूड बिजनेस ऑपरेटरों और ई-कॉमर्स कंपनियों से ऐसे प्रोडक्ट्स की लेबलिंग की जांच करने का निर्देश दिया है। ई-कॉमर्स कंपनियों से कहा गया है कि भविष्य में भी मिल्क लेबल के साथ प्लांट प्रोडक्ट्स को अपने प्लैटफॉर्म पर न बेचा जाए।
आदेश के अनुसार Food Products Standards and Food Aditives Regulations, 2011 में साफ तौर पर दूध और दुग्ध प्रोडक्ट्स के दिशा निर्देश दिए गए हैं और कहा गया है ऐसे उत्पाद के लिए डेयरी से जुड़े शब्दों का उपयोग नहीं किया जा सकता है। ये दूध या दूध से बने प्रोडक्ट्स ना हों।
इनमें अपवाद भी शामिल
हालांकि, इन प्रावधानों के कुछ अपवाद भी शामिल हैं। कुछ प्रोडक्ट्स के साथ नामकरण डेयरी से जुड़े शब्दों का उपयोग करा जा सकता है। अगर वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत सिद्धांत के आधार पर होंगे। कोकोनट मिल्क, पीनट बटर जैसे प्रोडक्ट्स का उपयोग आगे भी किया जाता रहेगा। ये अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्य हैं। ऐसे उत्पाद दूध या दूध के जुड़ी चीजों के विकल्प नहीं होते हैं। इसके साथ सोयाबीन कर्ड का उपयोग भी होता रहेगा क्योंकि कर्ड शब्द का उपयोग डेयरी के अतिरिक्त भी होता है।