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Youngest Billionaires: 22-25 साल की उम्र में अरबपति बन गए ये Gen Z, AI से बिजनेस खड़ा कर कमा लिये अरबों डॉलर

Gen Z Founders: फोर्ब्स की 2026 की अरबपतियों की लिस्ट में 30 साल से कम उम्र के रिकॉर्ड 35 अरबपति शामिल हैं। इनमें 12 ने अपनी संपत्ति खुद बनाई है। छह सबसे कम उम्र के सेल्फ-मेड अरबपतियों की दौलत एआई सॉफ्टवेयर कंपनियों Mercor और Cursor से जुड़ी है।
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Sep 17, 2026
Gen Z Billionaires
छोटी टीम के साथ AI बिजनेस से कई उद्यमियों ने बड़ा रेवेन्यू बनाया है। (PC: AI)

Gen Z Billionaires: कभी कारोबार खड़ा करने और अरबों की संपत्ति बनाने में दशकों लगते थे। लेकिन मौजूदा दौर में तस्वीर तेजी से बदल रही है। कुछ युवा ऐसे हैं, जिन्होंने कॉलेज की उम्र में ही ऐसी टेक कंपनियां खड़ी कर दीं, जिनकी वैल्यू अरबों डॉलर तक पहुंच गई। फोर्ब्स की 2026 वर्ल्ड्स बिलियनेयर्स लिस्ट में 30 साल से कम उम्र के रिकॉर्ड 35 अरबपति शामिल हैं। इनमें 12 ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी दौलत खुद बनाई है, यानी उन्हें यह संपत्ति विरासत में नहीं मिली। खास बात यह है कि इस युवा पीढ़ी के कारोबार में AI का दबदबा साफ नजर आता है। एआई से भर्ती से लेकर एआई की मदद से कोडिंग तक, नई पीढ़ी के फाउंडर्स सॉफ्टवेयर कंपनियों को तेजी से बड़े कारोबार में बदल रहे हैं।

एआई बिजनेस से बने अरबपति

यहां हम उन 6 युवाओं के बारे में जानेंगे, जिन्होंने एआई बिजनेस से अरबों की वेल्थ बना ली। इन सभी की संपत्ति का सीधा संबंध एआई टेक्नोलॉजी से है। Mercor की बात करें, तो यह कंपनी एआई कंपनियों को विशेषज्ञों से जोड़ने और एआई मॉडल की ट्रेनिंग व जांच में मदद करती है। वहीं, Cursor नाम की कंपनी एआई की मदद से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट को आसान और तेज बनाने पर काम करती है। यानी एआई का इस्तेमाल सिर्फ नई टेक्नोलॉजी बनाने में नहीं हो रहा। इससे नए बिजनेस मॉडल भी तैयार हो रहे हैं।

22 की उम्र में सेल्फ मेड अरबपति बने सूर्या मिधा

फोर्ब्स की 2026 लिस्ट में सूर्या मिधा दुनिया के सबसे कम उम्र के सेल्फ-मेड अरबपति हैं। उनकी उम्र 22 साल है और नेटवर्थ 2.2 अरब डॉलर। उन्होंने 2023 में ब्रेंडन फूडी और आदर्श हिरमठ के साथ मिलकर एआई आधारित रिक्रूटमेंट कंपनी Mercor शुरू की थी। यह फर्म बड़ी एआई कंपनियों को ऐसे विशेषज्ञों से जोड़ती है, जो एआई मॉडल की ट्रेनिंग और उनकी क्षमता जांचने में मदद करते हैं। कंपनी के तीनों को-फाउंडर्स के पास करीब 22-22 फीसदी हिस्सेदारी बताई गई है। मिधा अपने दोनों साथियों से कुछ महीने छोटे हैं और इसी वजह से उन्हें लिस्ट में सबसे कम उम्र का सेल्फ-मेड अरबपति माना गया है। Mercor की वैल्यू प्राइवेट निवेशकों के स्तर पर 10 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है।

ब्रेंडन फूडी ने कॉलेज छोड़ा और AI को दे दिया पूरा समय

Mercor के दूसरे को-फाउंडर ब्रेंडन फूडी हैं। ये कंपनी के सीईओ भी हैं। उनकी मुलाकात सूर्या मिधा और आदर्श हिरमठ से हाई स्कूल की डिबेट टीम के दौरान हुई थी। कंपनी शुरू करने के बाद फूडी ने Georgetown University छोड़ दी और पूरा ध्यान कंपनी बनाने पर लगा दिया। कंपनी का काम एआई कंपनियों को ऐसे प्रोफेशनल्स से जोड़ना है, जिनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल एआई मॉडल को ट्रेन और टेस्ट करने में किया जा सके। फोर्ब्स के अनुमान के मुताबिक फूडी की संपत्ति 2.2 अरब डॉलर है। खास बात यह है कि 22 साल की उम्र में इतनी बड़ी संपत्ति बनाने वाले फूडी को यह दौलत विरासत में नहीं मिली।

आदर्श हिरमठ की नेटवर्थ भी 2.2 अरब डॉलर

Mercor के तीसरे को-फाउंडर आदर्श हिरमठ कंपनी के CTO यानी चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर हैं। सूर्या मिधा और ब्रेंडन फूडी के साथ उन्होंने 2023 में कंपनी की शुरुआत की थी। तीनों की दोस्ती हाई स्कूल के दिनों से है। कंपनी की तेजी से बढ़ती वैल्यू ने तीनों फाउंडर्स को अरबपति क्लब में पहुंचा दिया। फोर्ब्स के अनुसार, तीनों के पास कंपनी की करीब 22 फीसदी हिस्सेदारी है। तीनों की अनुमानित व्यक्तिगत संपत्ति जोड़ें तो यह आंकड़ा करीब 6.6 अरब डॉलर बैठता है। यह कहानी बताती है कि एआई से जुड़े कारोबार में एक छोटी टीम भी बहुत तेजी से बड़ी वैल्यू तैयार कर सकती है।

अमन सेंगर: 14 साल की उम्र से कोडिंग, अब 1.3 अरब डॉलर की संपत्ति

25 साल की उम्र के अमन सेंगर उन चार युवा फाउंडर्स में शामिल हैं, जिन्होंने एआई बेस्ड कोडिंग प्लेटफॉर्म Cursor तैयार किया है। कोडिंग में उनकी दिलचस्पी काफी कम उम्र में शुरू हो गई थी। उन्होंने 14 साल की उम्र में कोड लिखना शुरू किया। बाद में उन्होंने एमआईटी में पढ़ाई की, जहां उनकी मुलाकात कंपनी के दूसरे को-फाउंडर्स से हुई। कंपनी से पहले सेंगर ने एक एआई कंसल्टेंसी शुरू की थी। उन्होंने Bridgewater Associates और गूगल में इंटर्नशिप भी की। एआई बूम के दौरान Cursor तेजी से लोकप्रिय हुआ। नवंबर में प्राइवेट निवेशकों ने कंपनी की वैल्यू 29.3 अरब डॉलर आंकी थी। यह कंपनी इस बात का उदाहरण है कि एआई किस तरह सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे बड़े प्रोफेशनल सेक्टर को बदल रहा है।

माइकल ट्रुएल: AI को बनाया प्रोग्रामर्स का साथी

25 साल की उम्र के माइकल ट्रुएल Cursor के को-फाउंडर हैं। यह एआई आधारित कोड एडिटर है, जिसका इस्तेमाल डेवलपर्स सॉफ्टवेयर लिखने, उसमें बदलाव करने और कोड को समझने के लिए करते हैं। ट्रुएल की मुलाकात अमन सेंगर और कंपनी के दूसरे फाउंडर्स से एमआईटी में हुई थी। बिजनेस की दुनिया में आने से पहले उन्होंने गूगल और क्वांटिटेटिव हेज फंड Two Sigma में इंटर्नशिप की थी। Cursor की तेज ग्रोथ के साथ कंपनी की प्राइवेट वैल्यू भी बढ़ती गई और नवंबर में यह 29.3 अरब डॉलर तक पहुंच गई। यानी AI यहां सिर्फ एक फीचर नहीं है। पूरी कंपनी का बिजनेस मॉडल ही एआई के इर्द-गिर्द खड़ा किया गया है। ट्रुएल की नेटवर्थ 1.3 अरब डॉलर है।

पाकिस्तान के सुलेह आसिफ भी अरबपति क्लब में हैं

26 साल के सुलेह आसिफ Cursor के को-फाउंडर और CTO हैं। उनका जन्म पाकिस्तान के कराची में हुआ था। 2016 से 2018 के बीच उन्होंने International Mathematical Olympiad में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद उन्हें स्कॉलरशिप पर एमआईटी में पढ़ाई का मौका मिला। वहीं उनकी मुलाकात Cursor के दूसरे फाउंडर्स से हुई। फोर्ब्स की 2026 लिस्ट में आसिफ पाकिस्तान से जुड़े एकमात्र अरबपति बताए गए हैं। आसिफ की नेटवर्थ 1.3 अरब डॉलर है।

इन छह युवाओं की अनुमानित कुल संपत्ति करीब 10.5 अरब डॉलर है। फोर्ब्स के आंकड़े 1 मार्च 2026 के आधार पर हैं। निजी कंपनियों की वैल्यू और शेयर बाजार में बदलाव के साथ इनकी नेटवर्थ भी बदल सकती है।

AI ने कमाई के नए रास्ते कैसे खोले?

AI रिक्रूटमेंट: कंपनियों को एआई मॉडल की ट्रेनिंग और टेस्टिंग के लिए खास विशेषज्ञों की जरूरत है।

AI कोडिंग: डेवलपर्स एआई की मदद से कोड लिखने, बदलने और समझने का काम पहले से तेज कर रहे हैं।

AI सॉफ्टवेयर: युवा कंपनियां एआई की क्षमताओं को सीधे कमर्शियल प्रोडक्ट में बदल रही हैं।

यही वजह है कि AI सेक्टर में काम करने वाली कुछ कंपनियों की वैल्यू बहुत कम समय में कई अरब डॉलर तक पहुंच रही है।

इन युवा अरबपतियों की कहानी से क्या पता चलता है?

बहुत कम उम्र में शुरुआत: इनमें से कई फाउंडर्स ने किशोरावस्था में ही कोडिंग या टेक्नोलॉजी के साथ प्रयोग शुरू कर दिया था।

बड़े मार्केट को किया टार्गेट: इन कंपनियों ने किसी छोटे बाजार तक खुद को सीमित नहीं रखा। एआई, रिक्रूटमेंट और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे बड़े सेक्टर्स की समस्याओं पर काम किया।

हिस्सेदारी से बनी असली दौलत: इनकी संपत्ति सिर्फ सैलरी से नहीं बनी है। स्टार्टअप में उनकी हिस्सेदारी की वैल्यू बढ़ने से नेटवर्थ में बड़ा उछाल आया।

छोटी टीम से बड़ा रेवेन्यू: सॉफ्टवेयर बिजनेस में एक छोटी टीम भी बड़ी संख्या में यूजर्स तक पहुंच सकती है। अगर प्रोडक्ट सफल हो जाए तो कंपनी की वैल्यू तेजी से बढ़ सकती है।

AI के दौर में बदल रहा है अरबपति बनने का तरीका

फोर्ब्स की यह लिस्ट एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है। नई पीढ़ी के कुछ फाउंडर्स ने एआई, सॉफ्टवेयर और तकनीकी विशेषज्ञता को बिजनेस का आधार बनाया और बेहद कम उम्र में अरबों डॉलर की कंपनी तैयार कर दी। Mercor और Cursor की कहानियां खास तौर पर दिखाती हैं कि एआई अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का हिस्सा नहीं रह गया है। यह नए कारोबार, नई नौकरियां और बड़ी कंपनियों की वैल्यू बनाने का जरिया भी बन रहा है।

Updated on:
17 Sept 2026 03:22 pm
Published on:
17 Sept 2026 03:22 pm