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टैक्स बचाने के लिए यहां करें निवेश, खूब मिलेगा रिटर्न

वित्त वर्ष 2021-22 खत्म होने में अब केवल एक महीने का समय रह गया है। सभी लोग इनकम टैक्स बचाने के लिए निवेश विकल्प की तलाश रहे है। वैसे इसकी तैयारी पहले ही शुरू कर देनी चाहिए। नौकरीपेशा लोगों के सामने टैक्स बचाना एक बड़ी चुनौती है।

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वित्त वर्ष 2021-22 खत्म होने में अब केवल एक महीने का समय रह गया है। सभी लोग इनकम टैक्स बचाने के लिए निवेश विकल्प की तलाश रहे है। वैसे इसकी तैयारी पहले ही शुरू कर देनी चाहिए। नौकरीपेशा लोगों के सामने टैक्स बचाना एक बड़ी चुनौती है। ज्यादातर लोग टैक्स रिटर्न फाइल करने के आखिरी दिनों में टैक्स बचाने की जोड़ तोड़ करते है। निवेश के साथ अच्छा निटर्न भी मिलने चाहिए। हम इस स्टोरी के जरिए आपको बताने की कोशिश कर है कि आखिर इन दोनों में से कौन सा विकल्प आपके लिए ज्यादा बेहतर रहेगा।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)
टैक्स बचाने के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) सबसे बढ़िया विकल्प है। इंवेस्टमेंट के साथ इसमें निटर्न भी अच्छा मिलता है। कोई भी व्यक्ति 500 रुपए के निवेश के साथ PPF Account खुलवा सकता है। सबसे खास बात टैक्सपेयर्स 1.5 लाख रुपए तक का अधिकतम डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इस फंड में निवेश करने पर वर्तमान में 7.1% का ब्याज मिल रहा है।

सुकन्या समृद्धि योजना
मोदी सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत सुकन्या समृद्धि योजना की शुरुआत की है। इस योजना में पैरेंट्स अपनी बेटियों की पढ़ाई या शादी से जुड़े भविष्य के खर्चों के लिए एक फंड जमा कर सकते है। इस स्कीम के तहत 7.6 फीसदी का ब्याज मिलता है।

नेशनल पेंशन स्कीम
यह भी सरकार की एक शानदार स्कीम है। इसमें रिटायरमेंट के समय फाइनेंशियल सिक्योरिटी मिलती है। इस स्कीम के तहत सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर के कर्मचारियों को टैक्स सेविंग का ऑप्शन मिलता है। इसमें 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक का डिडक्शन तो क्लेम कर सकते है।

जीवन बीमा पॉलिसी
इस योजना से कई प्रकार के फायदे मिलते है। टर्म इंश्योरेंस, ULIPs और एंडोमेंट प्लान के जरिए आप सालाना 1.5 लाख रुपये तक टैक्स बचा सकते हैं। इसके लिए इंश्योरेंस कवर सालाना प्रीमियम का 10 गुना होना चाहिए।

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF)
टैक्स बचाने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि के तहत कुछ निवेश कर सकते है। ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारी हर महीने EPF में अपनी कमाई का 12 प्रतिशत हिस्सा निवेश करते हैं। 80C के तहत इस पर सालाना 1.5 लाख तक की छूट मिलती है।

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