
भारतीय शेयर बाजार आज गुरुवार को भारी-भरकम बढ़त लेकर बंद हुआ है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी की हार से ईरान युद्ध के खत्म होने की उम्मीदें बढ़ी हैं। इसका सकारात्मक असर शेयर बाजारों पर पड़ा है। आज बीएसई सेंसेक्स 2.60 फीसदी या 2008 अंक की बढ़त के साथ 79,310 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी इस समय 2.40 फीसदी या 576 अंक की बढ़त के साथ 24,536 पर बंद हुआ। आइए जानते हैं कि मार्केट में आई इस भारी तेजी के पीछे बड़े कारण कौन-से हैं।
भारतीय शेयर बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट है। कई सप्ताह बाद क्रूड ऑयल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर से नीचे आया और गुरुवार को इसमें और गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार सुबह ब्रेंट क्रूड की कीमत 94 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रही थी। वहीं, अमेरिकी क्रूड WTI का भाव 87 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। एक दिन पहले के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट आई है।
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने भी वैश्विक बाजारों का रुख बदलने में अहम भूमिका निभाई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, दोनों सदनों में हार का सामना करना पड़ा है। ईरान युद्ध के कारण अमेरिका में एनर्जी की कीमतें बढ़ी थीं। इसका असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ा। चुनाव में हार के बाद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माना कि युद्ध और अमेरिका-इजरायल के संबंधों को लेकर मतदाताओं की नाराजगी ने रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन को प्रभावित किया। डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी की हार के बाद अब युद्ध खत्म होने की उम्मीदें बढ़ी हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर भी दिखाई दिया है। तेल सस्ता होने से महंगाई बढ़ने की आशंका कम हुई है। इसके चलते अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में खरीदारी बढ़ी और उनकी यील्ड में गिरावट आई। अमेरिका के 30 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटकर 5.2 फीसदी पर आ गई। वहीं, 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड 4.8 फीसदी और दो साल के बॉन्ड की यील्ड 4.5 फीसदी पर पहुंच गई। बॉन्ड की कीमत और उसकी यील्ड का रुख एक-दूसरे के उलट होता है। जब बॉन्ड की खरीदारी बढ़ती है तो उनकी कीमत ऊपर जाती है और यील्ड घटती है।
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में भी मजबूती देखने को मिली है। गुरुवार को रुपया शुरुआती कारोबार में करीब 0.3 फीसदी मजबूत होकर 94.35 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। यह करीब दो सप्ताह का ऊंचा स्तर है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को रुपये की मजबूती की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। तेल सस्ता होने से भारत का आयात खर्च घटने की उम्मीद है। इससे डॉलर की मांग पर भी दबाव कम हो सकता है।
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों पर राजनीतिक अंकुश बढ़ने की उम्मीद है। इससे दुनिया भर के बाजारों में टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता कम हो सकती है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। जानकारों का मानना है कि अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति से भारत पर व्यापार समझौते के लिए दबाव कम हो सकता है।
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी भी तेजी को मजबूती दे रही है। एनएसई के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में 7,284 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे। इस सप्ताह विदेशी निवेशक लगातार हर कारोबारी दिन शुद्ध खरीदार बने हुए हैं। नवंबर में उनकी खरीदारी का रुझान और मजबूत हुआ है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)