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Engineering से 52% ज्यादा सैलरी दे रही MBA की डिग्री, कैंपस प्लेसमेंट में बदला कंपनियों का फोकस

Deloitte India की रिपोर्ट के मुताबिक, कैंपस प्लेसमेंट में MBA भूमिकाओं की औसत सैलरी इंजीनियरिंग पदों से 52% ज्यादा रही और अगले सायकल में अंतर 59% तक पहुंच सकता है।
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Aug 27, 2026
MBA vs Engineering Salary
एमबीए वालों को इंजीनियरिंग की तुलना में ज्यादा सैलरी मिल रही है। (PC: AI)

MBA Vs Engineering: अगर आपको लगता है कि एमबीए की चमक अब पहले जैसी नहीं रही, तो तस्वीर कुछ और ही कहानी बता रही है। डेलॉयट इंडिया की कैंपस वर्कफोर्स ट्रेंड्स 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, कैंपस प्लेसमेंट में एमबीए करने वाले स्टूडेंट्स को इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स की तुलना में काफी ज्यादा सैलरी ऑफर हो रही है। इतना ही नहीं, आने वाले प्लेसमेंट सीजन में यह अंतर और बढ़ने का अनुमान है।

52% ज्यादा है सैलरी

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में MBA करने वालों की औसत सैलरी इंजीनियरिंग पदों की तुलना में 52% ज्यादा रही। अगले प्लेसमेंट सायकल में यह अंतर बढ़कर 59% तक पहुंच सकता है। यानी कंपनियों के लिए अब सिर्फ तकनीकी जानकारी रखने वाला उम्मीदवार काफी नहीं है। बिजनेस की समझ, लीडरशिप और टेक्नोलॉजी को कारोबारी नतीजों में बदलने की क्षमता भी खूब मायने रख रही है।

MBA वालों को क्यों मिल रही ज्यादा सैलरी?

डेलॉयट के मुताबिक, 2025 की क्लास में MBA भूमिकाओं के लिए औसत सैलरी इंजीनियरिंग पदों से 47% ज्यादा थी। 2026 की क्लास में यह अंतर बढ़कर 52% हो गया है। कंपनियों के बदले रुख की एक बड़ी वजह टेक्नोलॉजी और बिजनेस का तेजी से जुड़ना है। डेलॉयट ने जिन 250 कंपनियों का सर्वे किया, उन सभी ने तकनीकी भूमिका के साथ-साथ मैनेजमेंट और लीडरशिप क्षमता वाले उम्मीदवारों को ज्यादा महत्व दिया।

डेलॉयट के पार्टनर नीलेश गुप्ता के मुताबिक, कंपनियां ऐसे प्रोफेशनल चाहती हैं जो डिजिटल और एनालिटिकल स्किल्स के साथ कारोबारी समझ और रणनीतिक फैसले लेने की क्षमता भी रखते हों। आसान शब्दों में कहें तो कंपनियों को ऐसे लोग चाहिए जो टेक्नोलॉजी को सिर्फ समझें नहीं, बल्कि उससे बिजनेस को फायदा भी पहुंचा सकें।

टॉप B-स्कूल से MBA करने पर बड़ा फायदा

एमबीए की डिग्री का फायदा सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं है। जिस संस्थान से पढ़ाई की गई है, उसका भी पैकेज पर बड़ा असर पड़ रहा है। डेलॉयट के अनुसार, देश के टॉप 10 बिजनेस स्कूलों में औसत सालाना पैकेज करीब 27.4 लाख रुपये रहा। वहीं, टियर-3 बी-स्कूल्स में यह औसत करीब 8.4 लाख रुपये था। यानी संस्थान बदलते ही पैकेज में जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिल रहा है।

इंजीनियरिंग में भी तस्वीर ऐसी ही है। टॉप 10 संस्थानों से B.Tech करने वाले छात्रों के लिए औसत पैकेज करीब 18.7 लाख रुपये रहा, जबकि टियर-3 संस्थानों में यह आंकड़ा करीब 5.75 लाख रुपये था।

AI और डेटा स्किल्स वालों की भी बल्ले-बल्ले

कैंपस प्लेसमेंट में सिर्फ डिग्री के भरोसे नौकरी पाने का दौर धीरे-धीरे बदल रहा है। कंपनियां उम्मीदवार की वास्तविक स्किल्स को ज्यादा तवज्जो दे रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, AI और डेटा से जुड़ी स्किल्स रखने वाले उम्मीदवार 20 से 25% तक ज्यादा सैलरी प्रीमियम हासिल कर सकते हैं। वहीं, बेहतर Analytical Thinking और Problem Solving Skills रखने वाले उम्मीदवारों को 10 से 15% तक का प्रीमियम मिल सकता है। यानी अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आपने MBA किया है या B.Tech, सवाल यह भी है कि आपको आता क्या है और आप उस ज्ञान को कंपनी के काम में कितनी जल्दी लगा सकते हैं।

AI ने कैंपस हायरिंग का तरीका भी बदला

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ नौकरियों का हिस्सा नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया को भी बदल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 86% कंपनियों ने माना कि एआई या Agentic AI उनके भर्ती करने के तरीके को बदल रहा है। इसका असर रिज्यूमे की स्क्रीनिंग, उम्मीदवारों के आकलन और मूल्यांकन जैसे कामों में दिखाई दे रहा है। वहीं, 35% संगठनों ने बताया कि AI की वजह से नए पद या नई स्किल जरूरतें पैदा हुई हैं। FY25 में ऐसा कहने वाली कंपनियों की संख्या सिर्फ 21% थी। यह बदलाव बताता है कि आने वाले समय में AI की समझ रखने वाले छात्रों के लिए मौके बढ़ सकते हैं।

Updated on:
27 Aug 2026 06:07 pm
Published on:
27 Aug 2026 06:07 pm