
Personal Finance Tips: 20 की उम्र कमाने, खर्च करने और जिंदगी के नए फैसले लेने का दौर होता है। इस उम्र में सैलरी बढ़ती है तो खर्च भी धीरे-धीरे बढ़ने लगते हैं। अगर इस समय पैसों को संभालने की आदत नहीं बनी तो कमाई बढ़ने के बावजूद महीने के आखिर में जेब खाली मिल सकती है। अच्छी बात यह है कि मजबूत आर्थिक भविष्य के लिए आपको कोई बड़ा वित्तीय कदम उठाने की जरूरत नहीं है। बस कुछ आसान नियमों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना सकते हैं। शुरुआत छोटी रकम से हो सकती है, लेकिन आदत मजबूत होनी चाहिए।
सैलरी आते ही उसे बिना सोचे-समझे खर्च करने के बजाय पहले से तय कर लें कि पैसा कहां जाएगा। खर्च, बचत, निवेश और भविष्य के लक्ष्यों के लिए अलग-अलग रकम तय की जा सकती है। इसके लिए 'पे योरसेल्फ फर्स्ट' वाली रणनीति अपनाना काफी कारगर हो सकती है। यानी सैलरी आते ही सबसे पहले एक तय रकम सेविंग और निवेश के लिए अलग कर दें। इसके बाद बचे पैसे से बाकी खर्च करें। अगर आप यह सोचें कि महीने के आखिर में पैसे बचेंगे तो बचत कर लेंगे, तो कभी बचत शुरू नहीं कर पाएंगे।
सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, पैसों को मैनेज करने के लिए 50-30-20 नियम काफी आसान तरीका है। इसके तहत अपनी कमाई का करीब 50 फीसदी हिस्सा जरूरी खर्चों के लिए रखा जाता है। इसमें किराया, राशन, बिजली-पानी के बिल और रोजमर्रा की जरूरतें शामिल हो सकती हैं। करीब 30 फीसदी रकम उन चीजों पर खर्च की जा सकती है जो आपकी जरूरत नहीं बल्कि पसंद हैं। जैसे बाहर खाना, घूमना, शॉपिंग और मनोरंजन। बाकी 20 फीसदी रकम सेविंग और निवेश के लिए रखी जा सकती है।
हालांकि, यह कोई पत्थर की लकीर नहीं है। अगर किसी व्यक्ति की जिम्मेदारियां ज्यादा हैं, तो वह इन अनुपातों में बदलाव कर सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि खर्च शुरू करने से पहले बचत के लिए पैसा अलग हो।
जिंदगी कब करवट ले ले, कहा नहीं जा सकता। अचानक नौकरी चली जाए, मेडिकल इमरजेंसी आ जाए या घर में कोई बड़ा खर्च सामने आ जाए, तो ऐसी स्थिति में क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन का सहारा लेना महंगा पड़ सकता है। इसलिए कोशिश करें कि कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च के बराबर रकम इमरजेंसी फंड में जमा हो। यह पैसा ऐसी जगह रखा जाना चाहिए, जहां जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके। इमरजेंसी फंड का मकसद ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में आर्थिक सहारा देना है।
20 की उम्र में निवेश शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा समय है। इसलिए यह सोचकर निवेश टालना ठीक नहीं है कि जब सैलरी बड़ी हो जाएगी, तब पैसा लगाना शुरू करेंगे। शुरुआत छोटी रकम से भी की जा सकती है। जैसे-जैसे आमदनी बढ़े, निवेश की रकम भी बढ़ाई जा सकती है। कम उम्र में निवेश शुरू करने से नियमित निवेश की आदत बनती है और लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है। यही छोटी शुरुआत आगे चलकर बड़ा फंड तैयार करने में मदद कर सकती है।
20 की उम्र में क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। लेकिन सुविधा के चक्कर में लिया गया महंगा कर्ज भविष्य की बचत पर भारी पड़ सकता है। खासकर क्रेडिट कार्ड का बकाया अगर समय पर पूरा नहीं किया गया, तो ब्याज तेजी से बढ़ सकता है। इसी तरह पर्सनल लोन की EMI भी लंबे समय तक आय का बड़ा हिस्सा खा सकती है। इसलिए कोशिश करें कि क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर और संभव हो तो पूरा चुकाएं। अगर पर्सनल लोन लिया है तो उसकी ईएमआई समय पर भरें। महंगे कर्ज को जल्द खत्म करने की कोशिश करें, क्योंकि बचा हुआ ब्याज आगे की सेविंग और निवेश के काम आ सकता है।
20 की उम्र में टार्गेट रातोंरात अमीर बनना नहीं होना चाहिए। इस समय सबसे जरूरी है कि पैसे को लेकर ऐसी आदतें बनाई जाएं जो आने वाले वर्षों में भी आपके काम आती रहें। कम कमाई है तो कम से शुरुआत करें। बचत को ऑटोमेट करें, निवेश नियमित रखें और कर्ज का भुगतान समय पर करें। जैसे-जैसे सैलरी बढ़े, अपनी सेविंग और निवेश की रकम भी बढ़ाते जाएं।