कारोबार

क्या होता है Buyback Tax जिस पर लगेगा कैपिलट गैन टैक्स, जानें निवेशकों को राहत या झटका?

केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बायबैक की टैक्सेशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब बायबैक से मिलने वाली राशि को डिविडेंड की बजाय कैपिटल गेन के रूप में टैक्स किया जाएगा। यह बदलाव अल्पसंख्यक (माइनॉरिटी) शेयरधारकों की रक्षा और प्रमोटर्स द्वारा टैक्स आर्बिट्राज (टैक्स बचत का दुरुपयोग) रोकने के […]
2 min read
Feb 01, 2026
Budget 2026

केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बायबैक की टैक्सेशन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब बायबैक से मिलने वाली राशि को डिविडेंड की बजाय कैपिटल गेन के रूप में टैक्स किया जाएगा। यह बदलाव अल्पसंख्यक (माइनॉरिटी) शेयरधारकों की रक्षा और प्रमोटर्स द्वारा टैक्स आर्बिट्राज (टैक्स बचत का दुरुपयोग) रोकने के लिए किया गया है।

पहले का नियम vs नया नियम

पहले (2024 से लागू) बायबैक राशि को डिविडेंड इनकम माना जाता था, जिस पर शेयरधारक की स्लैब रेट (अधिकतम 30%+) टैक्स लगता था और कंपनी TDS काटती थी। इससे रिटेल निवेशकों को नुकसान होता था, क्योंकि पूरी राशि (मूल निवेश सहित) टैक्सेबल हो जाती थी और कैपिटल लॉस एडजस्टमेंट में दिक्कत आती थी।

नया नियम: बायबैक से मिली राशि पर केवल गेन (खरीद मूल्य से ज्यादा राशि) पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।
लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (12 महीने से ज्यादा होल्डिंग): 12.5% टैक्स (1.25 लाख तक छूट)

शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन: 20% टैक्स
टैक्स कंपनी की बजाय शेयरधारकों को देना होगा। प्रमोटर्स पर अतिरिक्त लेवी लगेगी, जिससे प्रभावी टैक्स रेट कॉरपोरेट प्रमोटर्स के लिए 22% और नॉन-कॉरपोरेट के लिए 30% हो जाएगा।

रिटेल निवेशकों को राहत

रिटेल और लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए यह बड़ा राहत वाला कदम है। पहले 30%+ स्लैब रेट से अब 12.5% (LTCG) या 20% (STCG) पर टैक्स लगेगा। इससे नेट रिटर्न बढ़ेगा और बायबैक ज्यादा आकर्षक बनेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बदलाव आम निवेशकों के लिए पॉजिटिव है, क्योंकि टैक्स बोझ कम होगा और कंप्लायंस आसान बनेगा।

प्रमोटर्स और कंपनियों पर झटका

प्रमोटर्स के लिए बायबैक अब कम फायदेमंद होगा, क्योंकि अतिरिक्त टैक्स से प्रभावी दर बढ़ जाएगी। इससे प्रमोटर्स डिविडेंड रूट चुन सकते हैं। कंपनियों को भी बायबैक के बजाय अन्य तरीकों से कैश रिटर्न पर विचार करना पड़ेगा। सरकार का मकसद टैक्स सिस्टम को निष्पक्ष बनाना और माइनॉरिटी शेयरधारकों को बचाना है।

प्रभावी तारीख और कुल प्रभाव

यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। कुल मिलाकर, रिटेल निवेशकों को राहत मिली है, जबकि प्रमोटर्स पर नियंत्रण बढ़ा है। यह कदम कैपिटल मार्केट में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाएगा, लेकिन प्रमोटर्स के लिए बायबैक रूट महंगा हो जाएगा। निवेशकों को अब बायबैक ऑफर में होल्डिंग पीरियड और टैक्स इम्प्लिकेशन ध्यान से देखने होंगे।

Updated on:
01 Feb 2026 10:39 pm
Published on:
01 Feb 2026 10:39 pm