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Budget 2026: शौकीनों को बड़ा झटका, जानें कितनी महंगी होगी शराब

Liquor

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Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 पेश करते हुए 'सिन गुड्स' पर टैक्स बढ़ाने का ऐलान किया, जिससे शराब पीने वालों को बड़ा झटका लगा है। बजट में शराब पर टैक्स में बढ़ोतरी और अन्य अप्रत्यक्ष कर बदलावों के कारण इसकी कीमतें बढ़ने की संभावना है। वहीं, कई जरूरी घरेलू सामान पर ड्यूटी कम करने से उपभोक्ताओं को राहत मिली है।

शराब पर टैक्स बढ़ोतरी – क्यों और कितना असर?

बजट में शराब (अल्कोहलिक लिकर) पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) दर को रेशनलाइज कर 1% से बढ़ाकर 2% कर दिया गया है। साथ ही, आयातित शराब पर कस्टम ड्यूटी में बदलाव और एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी के संकेत दिए गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, स्पिरिट्स और वाइन्स पर एक्साइज ड्यूटी 60% से बढ़ाकर 80% तक हो सकती है। इससे लोकल और इंपोर्टेड दोनों तरह की शराब महंगी हो जाएगी। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि रिटेल कीमतों में 10-20% तक की बढ़ोतरी हो सकती है, खासकर प्रीमियम और इंटरनेशनल ब्रांड्स पर। शहरों में बार और लोकल शराब की दुकानों पर असर ज्यादा दिखेगा, जबकि ग्रामीण इलाकों में क्षेत्रीय ब्रांड्स पर भी प्रभाव पड़ेगा।

सरकार का मकसद, राजस्व बढ़ाना और स्वास्थ्य

सरकार ने 'सिन गुड्स' (शराब, सिगरेट, तंबाकू) पर टैक्स बढ़ाकर राजस्व बढ़ाने और अत्यधिक सेवन को हतोत्साहित करने का लक्ष्य रखा है। इससे प्राप्त अतिरिक्त फंड्स को विकास कार्यों, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाया जा सकता है। हालांकि, शराब पर राज्य सरकारों का भी बड़ा नियंत्रण है, इसलिए अंतिम कीमतें राज्य स्तर पर एक्साइज ड्यूटी के आधार पर तय होंगी।

उपभोक्ताओं और इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया

शौकीनों में निराशा है, कई लोग इसे 'बड़ा झटका' बता रहे हैं। इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है कि इससे कंज्यूमर डिस्काउंट ब्रांड्स या सस्ते विकल्पों की ओर मुड़ सकते हैं। वहीं, कुछ लोग इसे स्वास्थ्य के लिए अच्छा कदम मान रहे हैं।

शराब के साथ ये चीजें हुई महंगी

बजट में शराब के अलावा सिगरेट, पान मसाला और लग्जरी गुड्स महंगे हुए हैं, लेकिन मोबाइल फोन, लेदर प्रोडक्ट्स, कैंसर दवाएं, माइक्रोवेव ओवन और विदेशी यात्रा सस्ती हुई हैं। सरकार ने जरूरी सामान पर ड्यूटी कम कर उपभोक्ता खर्च को संतुलित करने की कोशिश की है।

शौकीनों की ढीली होगी जेब

यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। शराब इंडस्ट्री में मैन्युफैक्चरर्स और रिटेलर्स अब कीमतें तय करने में व्यस्त होंगे। कुल मिलाकर, बजट 'ईज ऑफ लिविंग' पर फोकस करते हुए 'सिन गुड्स' पर सख्ती बरत रहा है, जिससे शौकीनों की जेब ढीली होगी।