Nifty-Gold Ratio: निफ्टी और सोने का रेश्यो इस समय 1.5 पर आ गया है। यह रेश्यो काफी कम है। यह रेश्यो बताता है कि शेयर सस्ते हो गए हैं।
Nifty-Gold Ratio: शेयर मार्केट और गोल्ड मार्केट में एक रेश्यो काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह है निफ्टी-गोल्ड रेश्यो। यानी निफ्टी-50 का स्तर और सोने की कीमत के बीच का अनुपात। 30 मार्च को यह अनुपात गिरकर 1.5 पर आ गया। यह वो स्तर है जिसे देखकर बाजार के जानकार कान खड़े कर लेते हैं। जब भी यह अनुपात 2.5 से नीचे आया है, निफ्टी ने उसके बाद ज़ोरदार वापसी की है।
Religare Broking के SVP अजित मिश्रा कहते हैं कि जब निफ्टी-गोल्ड रेश्यो 1.5 की तरफ आता है तो शेयर बाज़ार सोने के मुकाबले बहुत सस्ता दिखने लगता है। ऐतिहासिक रूप से यह घबराहट का नहीं, बल्कि मौके का वक्त रहा है। ऐसे समय में अक्सर कई सालों की तेज़ी की शुरुआत हुई है।
INVasset PMS के हर्षल दसानी ने इस रेश्यो को और गहराई से समझाया। उनका कहना है कि 1990 के दशक की शुरुआत से अब तक शेयर बाजार और सोने ने लंबे समय में लगभग एक जैसा रिटर्न दिया है। लोग शेयरों को ज़्यादा तवज्जो देते हैं, लेकिन सोना भी चुपचाप उतना ही कमाकर देता रहा है। खासकर तब जब रुपया कमज़ोर हो, महंगाई बढ़ रही हो या दुनिया में उथल-पुथल हो। अभी ठीक यही हो रहा है। ईरान युद्ध, महंगा कच्चा तेल, कमज़ोर रुपया। इन सब वजहों से सोना दौड़ रहा है और शेयर बाज़ार पिछड़ रहा है। इस कारण रेश्यो गिरा है।
लेकिन दसानी एक जरूरी बात कहते हैं। यह रेश्यो बताता है कि शेयर सस्ते हो गए हैं, लेकिन यह नहीं बताता कि वापसी कब होगी। जब तक महंगाई काबू में नहीं आती, तेल सस्ता नहीं होता और कंपनियों की कमाई का रास्ता साफ नहीं दिखता, तब तक सोने की चमक बनी रह सकती है।
मतलब साफ है। अभी शेयर बाजार में घुसने का मौका हो सकता है, लेकिन एकदम से सब कुछ दांव पर लगाना ठीक नहीं। और सोने को छोड़ना भी जल्दबाज़ी होगी। दसानी की सलाह एकदम सीधी है। सोना रखो, शेयर भी रखो। अंदाज़ा लगाने में वक्त मत गंवाओ, बस अपना पोर्टफोलियो संतुलित रखो। लंबे समय में असली फर्क यही करता है।
सोने के घरेलू वायदा भाव की बात करें तो एमसीएक्स पर सोमवार को सोना 1,47,450 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, चांदी का भाव 2,29,033 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था।