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Amazon Prime, Netflix, Jio Hotstar पर खर्च रकम से 20 साल में बना सकते हैं 6.4 लाख रुपये

OTT Subscription Cost: CA नितिन कौशिक ने बताया कि OTT प्लेटफॉर्म्स पर हर महीने खर्च होने वाले 700 रुपए को अगर इंडेक्स फंड में निवेश किया जाए तो 20 साल में यह रकम करीब 6.4 लाख रुपए बन सकती है।

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May 23, 2026
OTT सब्सक्रिप्शन लेने के बजाए इनवेस्टमेंट करना बेहतर है। (PC: X post)

Personal Finance: OTT प्लेटफॉर्म्स के सब्सक्रिप्शन के लिए हर महीने होने वाली 149 या 299 रुपए की कटौती इतनी छोटी लगती है कि ज्यादातर लोग इस पर ध्यान ही नहीं देते। आज के दौर में नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम और जियो-हॉटस्टार जैसे OTT प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन लेना एक आम आदत बन गई है। लेकिन CA नितिन कौशिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए बताया है कि यही छोटी सी रकम कैसे आपकी दौलत को चुपचाप खाती रहती है।

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सालाना खर्च होते हैं 10,000 रुपए

ईटी की एक रिपोर्ट में Ormax और FICCI EY के हवाले से बताया गया कि भारत में अब 143 मिलियन यानी (14.30 करोड़) से ज्यादा पेड OTT सब्सक्रिप्शन हो चुके हैं। साथ ही यह भी बताया कि ज्यादातर घरों में एक साथ कई प्लेटफॉर्म चलते हैं। एक सामान्य सेटअप में नेटफ्लिक्स स्टैंडर्ड 499 रुपए प्रति माह यानी 5,988 रुपये सालाना, अमेजन प्राइम 1,499 रुपए सालाना और जियो-हॉटस्टार प्रीमियम 1,499 रुपए सालाना पर मिलता है। इन तीनों को जोड़ दें तो सालाना खर्च करीब 9,000 रुपए हो जाता है। इसमें एक भी म्यूजिक या रीजनल स्ट्रीमिंग ऐप जुड़ जाए तो यह रकम आसानी से 10,000 रुपए सालाना पार कर जाती है।

OTT में खर्च पैसा ऐसे बनता 6.4 लाख

CA नितिन कौशिक ने अपनी पोस्ट में बताया कि आमतौर पर एक भारतीय औसतन हर साल OTT प्लेटफॉर्म्स पर करीब 8,400 रुपए खर्च करता है। यानी हर महीने करीब 700 रुपए। पहली बार में यह रकम बेहद मामूली लगती है। लेकिन अगर इसी 700 रुपए को हर महीने किसी इंडेक्स फंड में 12 फीसदी सालाना रिटर्न के हिसाब से निवेश किया जाए, तो 10 साल में यह करीब 1.6 लाख रुपए, 15 साल में करीब 3.5 लाख रुपए और 20 साल में करीब 6.4 लाख रुपए बन सकती है। कौशिक ने अपनी पोस्ट में लिखा कि आप किसी प्लेटफॉर्म को सिर्फ 700 रुपए महीना नहीं दे रहे, बल्कि आप उसे भविष्य की पूंजी सौंप रहे हैं।

क्यों रखते हैं ऑटो-डेबिट सिस्टम?

OTT प्लेटफॉर्म्स जानबूझकर ऑटो-डेबिट और रिकरिंग बिलिंग का सिस्टम बनाते हैं। कौशिक के मुताबिक इन प्लेटफॉर्म्स पर यूजर चर्न रेट यानी सब्सक्रिप्शन छोड़ने की दर 30 से 40 फीसदी तक होती है। इसलिए कंपनियां प्राइसिंग मॉडल इस तरह का बनाती है कि अगर यूजर उसे यूज न भी करे तो भी पैसे कटते रहते हैं। यह खर्च इतना मामूली लगता है कि लोगों को तब तक पता नहीं चलता जब तक नुकसान बड़ा न हो जाए।

OTT का जीवन पर असर

कई बार ऐसा होता है कि यूजर एक से ज्यादा सब्सक्रिप्शन ले लेता है। लेकिन इन सभी का फायदा उठाने के लिए उसके पास समय नहीं होता। इसका नतीजा यह होता है कि यूजर ऐसे कंटेंट पर पैसा खर्च कर रहा होता है, जिसका असल में वह उपयोग ही नहीं करता।

कैसे बचें इस समस्या से?

इस समस्या से निपटने के लिए कुछ आसान सुझाव निम्न हैं:

  • एक बार में केवल एक ही OTT प्लेटफॉर्म रखें। एक खत्म होने के बाद दूसरा लें।
  • सब्सक्रिप्शन के लिए क्रेडिट कार्ड का ऑटो-डेबिट बंद रखें। मैन्युअल पेमेंट से आप हर बार सोचने पर मजबूर होंगे कि क्या यह जरूरी है।
  • हर 30 दिन में बैंक स्टेटमेंट चेक करें और जो सब्सक्रिप्शन इस्तेमाल नहीं हो रही उन्हें तुरंत बंद करें।
  • बचाई गई रकम को हर महीने SIP या इंडेक्स फंड में डालने की आदत बनाएं।

असली दौलत कैसे बनती है?

कौशिक का मूल संदेश यही है कि अगर आप इन माइक्रो लीक्स पर ध्यान दें और उसी रकम को स्मार्ट तरीके से निवेश करें, तो बिना सैलरी बढ़ाए भी लंबे समय में बड़ी दौलत बनाई जा सकती है। वेल्थ बनाने के लिए ज्यादा सैलरी होना जरूरी नहीं है बल्कि छोटे-छोटे ऐसे खर्चों को कम करना जरूरी है जो काम भी नहीं आते।

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Updated on:
23 May 2026 10:22 am
Published on:
23 May 2026 10:19 am
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