
PM Modi Gold Appeal: हाल के महीनों में प्रधानमंत्री मोदी 2 बार लोगों से सोना न खरीदने की अपील कर चुके हैं। पहले 10 मई को पीएम ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी। इसके बाद एक सितंबर को भी पीएम ने लोगों को जरूरत न होने पर सोना न खरीदने की सलाह दी थी। अब सवाल यह है कि क्या पीएम की इस अपील का असर दिख रहा है? अगर देश में सोने के आयात के आंकड़े देखें तो लगता है कि पीएम की अपील का असर दिख रहा है।
मई में प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बाद से भारत में सोने के आयात में लगातार गिरावट देखने को मिली है। Metals Focus के आंकड़ों के मुताबिक, मई में भारत ने करीब 29.4 टन सोना आयात किया था, जबकि एक साल पहले इसी महीने यह आंकड़ा 30.6 टन था। यानी सालाना आधार पर आयात करीब 4% घटा। इसके बाद गिरावट और तेज हो गई। जून में गोल्ड इंपोर्ट करीब 20%, जुलाई में 23.7% और अगस्त में लगभग 30% कम हुआ है।
Metals Focus वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल यानी WGC के लिए सीधे तौर पर रिसर्च का काम करने वाली प्रमुख बाहरी एजेंसी है। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। सोने के आयात में आई इस गिरावट का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री की अपील को देना सही नहीं होगा।
मई में सरकार ने सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। इससे विदेश से सोना मंगाना पहले के मुकाबले महंगा हो गया। दूसरी तरफ सोने की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। जब सोना जेब पर ज्यादा भारी पड़ता है, तो आम ग्राहक खरीदारी टाल सकता है या कम मात्रा में खरीद सकता है। ऐसे में आयात पर भी असर पड़ना स्वाभाविक है। यानी मई के बाद आयात में आई कमी के पीछे कई वजहें एक साथ काम कर रही थीं।
पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर लोगों से सोने की खरीद सीमित करने की अपील की। ऐसे में अब देखना होगा कि इसका बाजार पर कितना असर पड़ता है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन का अनुमान है कि पीएम की नई अपील के बाद सितंबर में भारत का स्वर्ण आयात करीब 15% तक घट सकता है। अगर ऐसा होता है तो सरकार को यह संकेत मिल सकता है कि सोने की खरीद को लेकर लोगों के व्यवहार में कुछ बदलाव आया है।
दिलचस्प बात यह है कि इस साल के शुरुआत में कहानी बिल्कुल अलग थी। मई से पहले भारत का गोल्ड इंपोर्ट काफी तेजी से बढ़ रहा था। जनवरी में भारत ने 99.4 टन सोना आयात किया, जबकि जनवरी 2025 में यह मात्रा सिर्फ 36.6 टन थी। यानी एक साल में आयात 171.6% बढ़ गया। फरवरी में भी यही रफ्तार देखने को मिली। इस महीने आयात 30.8 टन से बढ़कर 66 टन हो गया। यानी सालाना आधार पर करीब 114.3% की बढ़ोतरी हुई।
इसके बाद मार्च में तस्वीर पलटी और सोने का आयात 50.5 टन से घटकर 32.9 टन रह गया। सालाना आधार पर इसमें 34.9% की गिरावट आई। हालांकि अप्रैल में फिर से खरीद बढ़ी। इस महीने भारत ने 45.6 टन सोना आयात किया, जो एक साल पहले के 34.9 टन से 30.7% ज्यादा था।
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। पहले स्थान पर चीन है। देश में सोने की मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा होता है। भारत आमतौर पर हर साल करीब 700 से 900 टन सोना आयात करता है। यही वजह है कि सरकार के लिए सोने का आयात सिर्फ ज्वेलरी की डिमांड का मामला नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।
भारत में परिवारों के पास बड़ी मात्रा में सोना रखा हुआ है। अनुमान के मुताबिक भारतीय घरों में करीब 31,000 टन सोना मौजूद है। सरकार की कोशिश सिर्फ नया सोना खरीदने से लोगों को रोकने की नहीं है। उसका बड़ा लक्ष्य यह भी है कि घरों में पड़ा इतना बड़ा सोने का भंडार अर्थव्यवस्था में इस्तेमाल हो। अगर घरेलू सोने का कुछ हिस्सा बाहर आता है और नए सोने का आयात घटता है, तो इससे देश के व्यापार संतुलन और चालू खाते पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
मई के बाद सोने के आयात में गिरावट जरूर आई है। मगर उससे पहले जनवरी और फरवरी में आयात में जबरदस्त बढ़ोतरी भी हुई थी। इसलिए केवल कुछ महीनों के आंकड़ों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रधानमंत्री की अपील ने ही लोगों की सोना खरीदने की आदत बदल दी। अब असली परीक्षा सितंबर में होगी। अगर बुलियन इंडस्ट्री का अनुमान सही बैठता है और सोने का आयात करीब 15% घटता है, तो यह सरकार के लिए एक अहम संकेत होगा। इससे पता चलेगा कि महंगे सोने, बढ़ी हुई ड्यूटी और प्रधानमंत्री की अपील का मिलाजुला असर भारतीय ग्राहकों पर कितना पड़ा है।