
PPF Calculation: अगर आप पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF में लंबे समय के लिए पैसा जमा कर रहे हैं, तो निवेश का तरीका आपके फंड के रिटर्न पर करीब 1 लाख रुपये का अंतर ला सकता है। PPF Calculator की गणना से पता चलता है कि 15 साल तक हर महीने 10 हजार रुपये जमा करने के बजाए यदि कोई व्यक्ति हर साल 1.2 लाख रुपये जमा करता है तो उसे ज्यादा रिटर्न मिलता है। इन दोनों तरीकों से मिलने वाले रिटर्न में करीब 1 लाख रुपये का अंतर होता है। आइए जानते है ऐसा क्यों होता है।
अगर कोई व्यक्ति 15 साल तक हर महीने 10,000 रुपये PPF में जमा करता है, तो उसका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। इस पर 7.1 फीसदी सालाना ब्याज दर के आधार पर उसे लगभग 13,55,680 रुपये ब्याज के मिल सकते हैं। इस तरह 15 साल बाद कुल मैच्योरिटी राशि करीब 31,55,680 रुपये हो सकती है।
अगर हर साल 1.2 लाख रुपये एकमुश्त जमा किए जाएं और यह निवेश हर वित्त वर्ष में 5 अप्रैल तक कर दिया जाए, तो 15 साल में कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। इस पर करीब 14,54,568 रुपये का ब्याज मिल सकता है। ऐसे में मैच्योरिटी पर कुल रकम लगभग 32,54,568 रुपये होगी। इस तरह प्रति माह निवेश और सालाना एकमुश्त निवेश के रिटर्न में 98,888 रुपये का अंतर आएगा।
पीपीएफ में ब्याज हर महीने की 5 तारीख से महीने के आखिरी दिन तक के सबसे कम बैलेंस पर मिलता है। इसलिए अगर आप वित्त वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल की 5 तारीख तक एकमुश्त 1.2 लाख रुपये जमा कर देते हैं, तो पूरी राशि पूरे 12 महीनों तक ब्याज कमाती है। वहीं, हर महीने 10 हजार रुपये जमा करने पर अप्रैल वाली किस्त तो 12 महीने ब्याज कमाती है, लेकिन मई वाली 11 महीने, जून वाली 10 महीने और इस तरह वित्त वर्ष के आखिरी महीने मार्च वाली सिर्फ 1 महीने का ब्याज कमा पाती है। इस तरह औसत में पैसा कम समय तक ब्याज कमाता है। इसी वजह से लंबे समय में यही छोटा-सा फर्क चक्रवृद्धि ब्याज के कारण लगभग 98,888 रुपये का अंतर पैदा कर देता है। इसलिए एकमुश्त निवेश से ज्यादा फंड बनता है।
टैक्स एवं निवेश सलाहकार बलवंत जैन के अनुसार, PPF में एक वित्त वर्ष में कम से कम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं। 15 साल की अवधि पूरी होने के बाद खाते को पांच-पांच साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। सातवें वित्त वर्ष से नियमों के तहत आंशिक निकासी की सुविधा भी मिलती है। PPF EEE कैटेगरी की योजना है। यानी निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी तीनों पर कोई टैक्स नहीं लगता। निवेश पर टैक्स छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है और खाते की शर्तों के अनुसार मैच्योरिटी की रकम टैक्स-फ्री होती है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)