US Iran War Energy Crisis: कतर से गैस की सप्लाई बाधित होने के चलते भारत को अमेरिका, ओमान और नाइजीरिया जैसे देशों से महंगी गैस खरीदनी पड़ रही है।
US Iran War Energy Crisis: भारत ने वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच महंगी स्पॉट गैस की ओर रुख किया है और पेट्रोकेमिकल्स पर शुल्क घटाकर घरेलू आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की है। कतर में ईरान के हमलों से गैस आपूर्ति बाधित होने के बाद सरकार ने अमरीका, ओमान और नाइजीरिया जैसे देशों से आयात बढ़ाया है । कतर से आयात में 93% की भारी गिरावट आई, तो वहीं अमरीका से आयात 37% बढ़ा है। कतर के रास लाफान गैस संयंत्र पर हमलों के बाद आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके चलते भारत ने तेजी से वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया।
मार्च में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात फरवरी के मुकाबले 90% बढ़ गया। जबकि पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होने के कारण देश का कुल तेल आयात लगभग 15% घट गया है। अंगोला, गैबॉन, घाना और कांगो जैसे अफ्रीकी देशों से आयात भी बढ़ा। हालांकि, भारत के कुल तेल आयात में उनकी हिस्सेदारी अभी भी अपेक्षाकृत कम रही। इन आपूर्तियों से कुछ हद तक राहत मिली है। अप्रेल में रूस से आपूर्ति मजबूत रहने की उम्मीद है।
वैकल्पिक आपूर्ति ने तत्काल राहत दी है, लेकिन यह आपातकालीन रणनीति महंगी साबित हो रही है, क्योंकि स्पॉट गैस की कीमतें दीर्घकालिक अनुबंधों की में तुलना काफी अधिक हैं। मार्च में प्राकृतिक गैस की औसत कीमत 20 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच गई, जो जनवरी 2023 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट उपलब्धता का नहीं, बल्कि ऊंची कीमतों का है। कतर गैस संयंत्र की मरम्मत में पांच साल तक लगने की आशंका है, साथ ही होर्मुज बाधाओं से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बना हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल है। क्रूड ऑयल WTI 11.41 फीसदी या 11.42 डॉलर की बढ़त के साथ 111.5 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है। वही, ब्रेंट क्रूड 7.78 फीसदी या 7.87 डॉलर की बढ़त के साथ 109 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है।