
Raksha Bandhan Financial Gifts: रक्षाबंधन पर बहन को कपड़े, मिठाई या लिफाफे में पैसे देने का चलन तो खूब है। लेकिन अगर इस बार ऐसा तोहफा दिया जाए, जिसका फायदा सिर्फ त्योहार के दिन नहीं, बल्कि आने वाले कई सालों तक मिले तो कैसा हो। हम बात कर रहे हैं, कुछ ऐसे फाइनेंशियल गिफ्ट्स की, जो आपकी बहन की वित्तीय स्थिति मजबूत कर सकते हैं। आप बहन के लिए SIP शुरू कर सकते हैं, उसके इमरजेंसी फंड में पैसा जोड़ सकते हैं या किसी बड़े सपने को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। खास बात यह है कि इसके लिए बहुत बड़ी रकम की जरूरत भी नहीं है।
अगर आपकी बहन कमाती है, लेकिन अभी तक निवेश शुरू नहीं किया है, तो उसके लिए SIP शुरू करना अच्छा तोहफा हो सकता है। आप उसे एसआईपी में निवेश करना सिखाएं और पहली किश्त खुद ही भर दें। उदाहरण के लिए, 2,000 रुपये महीने की एसआईपी आज बहुत बड़ी रकम नहीं लगती, लेकिन कई साल तक नियमित निवेश करने पर बाजार के रिटर्न के हिसाब से अच्छी रकम जमा हो सकती है। इस तोहफे की सबसे बड़ी खासियत पैसा नहीं, बल्कि निवेश की शुरुआत है।
हर तोहफा दिखने में शानदार हो, यह जरूरी नहीं। कई बार सबसे काम का तोहफा वही होता है, जो मुश्किल समय में साथ खड़ा रहे। अगर आपकी बहन आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है, लेकिन उसके पास पर्याप्त इमरजेंसी फंड नहीं है, तो आप इसमें योगदान कर सकते हैं। मसलन, 10,000 रुपये देकर उसे सलाह दे सकते हैं कि इस रकम को किसी सेफ जगह इन्वेस्ट करे और सिर्फ जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करे। अचानक मेडिकल खर्च, नौकरी जाने या किसी दूसरी अनहोनी की स्थिति में यही पैसा सहारा बन सकता है।
अगर आपकी बहन सुरक्षित और लंबे समय के निवेश को प्राथमिकता देती है तो उसका पीपीएफ खाता खुलवा सकते हैं। आप इसमें शुरुआती योगदान भी दे सकते हैं। इससे आपकी बहन को भविष्य के लिए पैसा बचाने की आदत डालने में मदद मिलेगी। इसके साथ एक छोटा सा नोट भी दिया जा सकता है, जिसमें लिखा हो, "यह तोहफा आपके आने वाले कल के लिए।"
हर व्यक्ति शेयर बाजार या बाजार से जुड़े निवेश में सहज नहीं होता। अगर आपकी बहन भी कम जोखिम वाले विकल्प पसंद करती है, तो फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD उसके लिए ज्यादा सही हो सकती है। आप उसे एकमुश्त रकम देकर FD कराने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
मान लीजिए आपकी बहन लंबे समय से कोई कोर्स करना चाहती है, लैपटॉप खरीदना चाहती है, घूमने जाना चाहती है या किसी बड़ी खरीदारी के लिए पैसा जोड़ रही है। आप उसे सीधे 10,000 या 20,000 रुपये देने के बजाय उसी लक्ष्य में योगदान कर सकते हैं। इससे तोहफे की अहमियत सिर्फ रकम तक सीमित नहीं रहती। संदेश यह जाता है कि "मुझे पता है कि तुम क्या चाहती हो और मैं तुम्हें वहां तक पहुंचने में मदद करना चाहता हूं।"