सीओएआई और रिलायंस दोनों ने दूरसंचार विभाग और ट्राई को अपने-अपने रुख से अवगत कराया है। वहीं ट्राई का कहना है कि इस पर दूरसंचार विभाग को फैसला लेना है।
रिलायंस जियो 4जी के लॉन्च से पहले से मैदान में मौजूद कंपनियों और रिलांयस के बीच तकरार शुरू हो गई है। पुरानी कंपनियों की पैरवी सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया(सीओएआर्इ) कर रही है।
सीओएआर्इ का कहना है कि नए खिलाड़ी के आने से जमे जमाए खिलाड़ी अपना मार्केट शेयर बचाने को कड़े कदम उठाएंगी। वहीं रिलायंस जियो का कहना है कि पहले से मौजूद कंपनियां उसके प्रवेश को रोकने में लगी हुई हैं। टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई भी खुद को इस लड़ाई में शामिल किया गया हुआ महसूस कर रहा है। जहां तक ग्राहकों की बात हैं तो वे उम्मीद कर सकते हैं कि आने वाले दिनों में टैरिफ प्लान सस्ते होंगे।
जियो पर आरोप, चोक कर रही नेटवर्क : मोबाइल कंपनियों का पक्ष रखने वाली इस संस्था का कहना है कि रिलांयस जियो प्रतिद्वंदी कंपनियों भारती एयरटेल, आइडिया सेल्युलर, वोडाफोन के नेटवर्क को चोक कर रही है। वह ट्रायल के नाम पर पूरी सेवाएं दे रही हैं। दूरसंचार विभाग को खत लिखकर कहा गया है कि इसके कनेक्शन रोके जाने चाहिए।
टेस्ट के संबंध में नहीं हैं नियम क्या है नियम: टेस्ट रन को लेकर कोई नियम नहीं है। इस महीने की शुरुआत में दूरसंचार विभाग ने ट्राई को खत लिखकर कहा था कि वह ट्रायल मोड से कमर्शियल लॉन्च में आने पर अपना रूख बताए। हालांकि दूरसंचार मामलों के एक जानकार ने बताया कि जियो ने अभी तक कोई प्लान जारी नहीं किया है और इसके चलते वह कमर्शियल सेवा के दायरे में नहीं आती।
रिलायंस जियो का क्या है विचार: इस मामले पर रिलायंस जियो का कहना है कि पहले से मौजूद टेलीकॉम कंपनियां उसके खिलाफ काम कर रही हैं। ये कंपनियां उसका प्रवेश रोकने में लगी है।
सरकार की क्या स्थिति: सीओएआई और रिलायंस दोनों ने दूरसंचार विभाग और ट्राई को अपने-अपने रुख से अवगत कराया है। वहीं ट्राई का कहना है कि इस पर दूरसंचार विभाग को फैसला लेना है।