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चोट एक घाव अनेक, LPG Cylinder में 933 रुपये की बढ़ोतरी को हल्के में न लें, पूरे बाजार पर पड़ेगा असर

LPG Price Hike: कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 933 रुपये की बढ़ोतरी से छोटे रेस्टोरेंट और ढाबों पर बड़ा असर पड़ा है। इससे खाने के दाम बढ़ सकते हैं, रोजगार पर असर पड़ सकता है और लोकल अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

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भारत

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Pawan Jayaswal

May 01, 2026

lpg price hike

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर महंगा हो गया है। (PC: AI)

LPG price hike: रसोई गैस महंगी हुई है, तो असर सिर्फ किचन तक नहीं रहेगा, बल्कि पूरा बाजार हिल जाएगा। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में एक ही झटके में 933 रुपये की बढ़ोतरी ने छोटे रेस्टोरेंट्स, ढाबों और कैटरिंग कारोबार की सांसें अटका दी हैं। अब सवाल है- क्या खाना महंगा होगा? जवाब है, हां। सबसे ज्यादा मार छोटे कारोबारियों पर पड़ेगी। बड़े होटल किसी तरह झेल जाएंगे, लेकिन असली चोट छोटे कारोबारियों पर ही है। सड़क किनारे के ढाबों, छोटे रेस्टोरेंट्स, बेकरी और क्लाउड किचन सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इनका पूरा कारोबार गैस पर टिका होता है। कमाई पहले ही कम थी और अब खर्च अचानक बढ़ गया है। दिल्ली में अब एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 3,071.50 रुपये पर पहुंच गई है।

पहले से ही दबाव में थे छोटे बिजनेस

यह बढ़ोतरी ऐसे वक्त पर आई है, जब छोटे बिजनेस पहले ही परेशान थे। कच्चा माल महंगा होने, ग्राहक घटने और मुनाफा गिरने से छोटे बिजनेसेस पर पहले से ही मार थी। अब गैस महंगी होने से हालात और बिगड़ गए हैं।

असर सिर्फ मालिक पर नहीं, मजदूर पर भी है

अगर रेस्टोरेंट की कमाई गिरेगी, तो सबसे पहले असर कर्मचारियों पर पड़ेगा। काम के घंटे कम होंगे। नौकरियां जा सकती हैं और रोज कमाने वालों की कमाई घटेगी। यानी इससे सिर्फ बिजनेस पर ही नहीं, रोजगार पर भी असर पड़ेगा।

PNG की तरफ बढ़ सकता है रुख

सरकार और गैस कंपनियां पहले से ही पाइप गैस यानी PNG को बढ़ावा दे रही हैं। पीएनजी में लगातार सप्लाई मिलती है। सिलेंडर की झंझट नहीं होती और यह ज्यादा सुरक्षित भी है। लेकिन दिक्कत यह है कि हर जगह PNG उपलब्ध नहीं है। छोटे दुकानदारों के लिए शिफ्ट करना आसान भी नहीं है।

महंगाई का नया खतरा

जब खाने-पीने की चीजें महंगी होती हैं, तो असर दूर तक जाता है। सब्जी वाले की बिक्री घटती है। दूध सप्लायर की मांग कम होती है। ट्रांसपोर्ट और पैकेजिंग पर असर पड़ता है। यानी पूरी लोकल इकॉनमी पर दबाव बढ़ता है।

भारत के ग्रोथ मॉडल पर असर

भारत की अर्थव्यवस्था छोटे खर्चों पर चलती है। लोग रोज थोड़ा-थोड़ा खर्च करते हैं। अगर वही खर्च कम हो गया, तो बाजार की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।