कारोबार

Subhash Chandra Case में हुई CBI की एंट्री, दर्ज की FIR, जानिए क्या है पूरा मामला

Subhash Chandra Insolvency: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के खिलाफ CBI ने LIC Housing Finance से जुड़े 1,322 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड मामले में FIR दर्ज की है।
2 min read
Sep 05, 2026
Subhash Chandra CBI FIR
सुभाष चंद्रा पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है। (PC: AI)

Subhash Chandra CBI FIR: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उनके खिलाफ 1,322 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड मामले में FIR दर्ज की है। मामला LIC Housing Finance से जुड़ा है। इस मामले में सुभाष चंद्रा के अलावा तीन अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। सीबीआई की यह कार्रवाई ऐसे वक्त हुई है, जब सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया को लेकर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में पहले से ही विवाद चल रहा है। तीन दिन पहले ही चंद्रा ने उनकी व्यक्तिगत दिवालिया याचिका की सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय एनसीएलटी बेंच बनाए जाने का विरोध किया था।

6.25 करोड़ के रिपेमेंट प्लान पर रोक

दरअसल, एनसीएलटी में उनकी ओर से पेश किए गए रिपेमेंट प्लान को लेकर मामला काफी पेचीदा हो गया है। मंगलवार को पांच सदस्यीय स्पेशल बेंच ने इस प्लान को मंजूरी देने पर रोक लगा दी। बेंच का कहना था कि पहले दिए गए फैसले में स्पष्ट बहुमत नहीं था। इसके साथ ही सुभाष चंद्रा को किसी भी संपत्ति को बेचने या ट्रांसफर करने से भी रोक दिया गया है।

22,000 करोड़ के दावों के सामने सिर्फ 6.25 करोड़ का रिपेमेंट प्लान

इस पूरे विवाद की जड़ में सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा कर्ज है। पिछले सप्ताह एनसीएलटी के न्यायिक सदस्य निलेश शर्मा ने तीसरे सदस्य के तौर पर सुभाष चंद्रा की ओर से पेश रिपेमेंट प्लान को मंजूरी दी थी। यह प्लान IBC की धारा 114 के तहत पेश किया गया था। पहले एनसीएलटी के दो सदस्यों ने इस मामले में अलग-अलग राय दी थी। इसके बाद ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष ने निलेश शर्मा को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव के तहत सुभाष चंद्रा को व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर 6.25 करोड़ रुपये देने थे। इसके अलावा मुख्य कर्जदार कंपनियों की ओर से अलग से 1,494 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था। इस प्रस्ताव को कर्जदाताओं के 80.8 फीसदी वोटिंग शेयर का समर्थन मिला था।

लेकिन एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस समेत कुछ बड़े कर्जदाताओं ने इसका विरोध किया। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक, आरबीएल बैंक और यूनियन बैंक इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने वालों में शामिल थे।

एलआईसी हाउसिंह फाइनेंस ने जताई थी कड़ी आपत्ति

एलआईसी हाउसिंह फाइनेंस ने इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। कंपनी का कहना था कि स्वीकार किए गए दावों की रकम करीब 22,006 करोड़ रुपये है, जबकि प्रस्ताव में कर्जदाताओं को सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत गारंटी के बदले सिर्फ 6.25 करोड़ रुपये देने की बात कही गई है। कंपनी ने इस प्रस्ताव को अव्यावहारिक और गैरकानूनी तक बताया था। यही वजह है कि सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं।

Updated on:
05 Sept 2026 03:03 pm
Published on:
05 Sept 2026 02:59 pm