
Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार आज भारी बढ़त लेकर बंद हुआ है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 2.11 फीसदी या 1533 अंक की बढ़त के साथ 74,315 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी 1.66 फीसदी या 374 अंक की बढ़त के साथ 22,997 पर बंद हुआ। आइए जानते हैं कि बाजार में आज आई भारी तेजी के पीछे कौन-से बड़े कारण रहे हैं:
आईटी सेक्टर गुरुवार की तेजी के प्रमुख कारणों में शामिल रहा। टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा के शेयर लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में चढ़े। बेहतर तिमाही नतीजों और खासकर एचसीएल टेक के अच्छे रिजल्ट ने निवेशकों की धारणा मजबूत की। दूसरी ओर, वैश्विक एआई शेयरों में भारी गिरावट का भी भारतीय आईटी कंपनियों को फायदा मिल रहा है। लंबे समय से कुछ विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से पैसा निकालकर अमेरिकी AI कंपनियों में निवेश कर रहे थे। अगर वैश्विक निवेश का रुख बदलता है, तो भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम हो सकती है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, एआई शेयरों में गिरावट भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो भारतीय शेयरों से पैसा निकालने वाले विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) अपनी रणनीति बदल भी सकते हैं।
15 अक्टूबर यानी आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी का दिन भी था। ऐसे दिन फ्यूचर और ऑप्शन (F&O) में कारोबार करने वाले ट्रेडर अपनी पोजिशन बंद करते हैं या आगे की अवधि के लिए बढ़ाते हैं। इससे बाजार में सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है। अगर गिरावट की उम्मीद में लगाए गए दांव वापस लिए जाते हैं, तो शॉर्ट कवरिंग के कारण बाजार तेजी से ऊपर जा सकता है। वहीं, नई बिकवाली या पहले से खरीदे गए सौदों को बंद करने से बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए एक्सपायरी वाले दिन बाजार की तेजी को केवल निवेशकों की मजबूत खरीदारी का संकेत मानना ठीक नहीं होगा। कारोबार की दिशा समझने के लिए बाजार में खरीद-बिक्री की वॉल्यूम और प्रमुख स्तरों पर नजर रखना जरूरी होता है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी भारतीय बाजार में निवेशकों का कॉन्फिडेंस बढ़ाया है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 1.76 डॉलर यानी 1.75% गिरकर 104 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिकी WTI क्रूड भी 1.02 डॉलर यानी 1.07% गिरकर 94.07 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चा तेल सस्ता होने से आयात बिल और महंगाई का दबाव कम हो सकता है। इससे रुपये और कंपनियों की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना रहती है।
गुरुवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत खुला। रुपया 0.2% की बढ़त के साथ 94.92 प्रति डॉलर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में इसका बंद भाव 95.15 था। रात के कारोबार में डॉलर 18 महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद कमजोर हुआ था। डॉलर में नरमी से रुपये को सपोर्ट मिला। रुपये की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, दोनों भारत के लिए राहत दे सकते हैं। इससे आयात की लागत और महंगाई पर दबाव कम होने की संभावना रहती है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और वैश्विक आर्थिक घटनाओं के कारण रुपये में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निफ्टी के 23,000 का स्तर फिर हासिल करने के बाद अब बाजार की नजर इस बात पर है कि तेजी कितनी टिकाऊ साबित होती है। तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, 22,800 का स्तर आगे बाजार की दिशा समझने में अहम भूमिका निभा सकता है। आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के सीनियर मैनेजर, टेक्निकल रिसर्च, जिगर एस. पटेल ने 22,800 को महत्वपूर्ण स्तर बताया है। उनके अनुसार, निफ्टी का इस स्तर से ऊपर निकलना शॉर्ट टर्म में खरीदारी बढ़ने का संकेत है।
उन्होंने बताया कि निफ्टी का प्रति घंटे वाला रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) अगस्त 2026 के बाद पहली बार 70 के ऊपर गया है। RSI एक तकनीकी संकेतक है, जिससे शेयर या इंडेक्स में खरीदारी और बिकवाली की ताकत का अंदाजा लगाया जाता है। अब बाजार के सामने असली परीक्षा यह होगी कि गिरावट आने पर निफ्टी 22,800 के ऊपर टिक पाता है या नहीं। तकनीकी भाषा में इसे 'रेजिस्टेंस का सपोर्ट में बदलना' कहा जाता है। अगर निफ्टी इस स्तर के आसपास टिकता है और खरीदारी बनी रहती है, तो तेजी को मजबूती मिलने की संभावना बढ़ सकती है। इसके उलट, अगर इंडेक्स लगातार 22,800 से नीचे फिसलता है, तो मौजूदा तेजी कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में तेजी को नए बुल रन की शुरुआत मानने से बचना चाहिए।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)