
आईटी शेयरों में तेजी देखी जा रही है। (PC: AI)
IT Stocks Rally: आईटी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से कारोबार बढ़ने की उम्मीद ने शेयर बाजार में आईटी सेक्टर का जोश बढ़ा दिया है। गुरुवार, 15 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में आईटी शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। HCL टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा और इंफोसिस समेत कई कंपनियों के शेयर चढ़े। इसके चलते निफ्टी IT इंडेक्स में 2.5% की तेजी देखने को मिली। खास बात यह है कि पिछले तीन कारोबारी सत्रों में यह इंडेक्स करीब 9% उछल चुका है।
आईटी शेयरों में तेजी के पीछे कंपनियों के बेहतर नतीजे, AI सर्विसेस से कमाई बढ़ने की उम्मीद और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी जैसे कारण हैं। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या यह तेजी आने वाले दिनों में भी बनी रहेगी या फिर हालिया उछाल के बाद मुनाफावसूली देखने को मिलेगी।
गुरुवार को कारोबार के दौरान HCL टेक्नोलॉजीज का शेयर करीब 3.5% चढ़कर आईटी शेयरों में सबसे आगे रहा। टेक महिंद्रा और टीसीएस के शेयरों में 3% से ज्यादा की तेजी आई। जबकि इंफोसिस करीब 2.5% मजबूत हुआ। LTM, विप्रो और एमफैसिस के शेयरों में भी 1% से 2% तक की बढ़त दर्ज की गई। आईटी शेयरों में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे सामने आ रहे हैं। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि कंपनियों की एआई सर्विसेस से वास्तव में कितनी कमाई हो रही है और नई डील्स का कारोबार पर कितना असर पड़ रहा है।
HCL टेक्नोलॉजीज के सितंबर तिमाही के नतीजे बाजार की उम्मीद से बेहतर रहे। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 3.72 अरब डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया। यह पिछली तिमाही के मुकाबले 2% और पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 2.2% ज्यादा है। भारतीय रुपये में कंपनी का रेवेन्यू 35,620 करोड़ रुपये रहा। इसमें तिमाही आधार पर 3% और सालाना आधार पर 11.51% की बढ़ोतरी हुई। कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा भी सालाना आधार पर 21.18% बढ़कर 5,132 करोड़ रुपये पहुंच गया।
कंपनी के कारोबार में नए सौदों का भी अहम योगदान रहा। सितंबर तिमाही में HCL टेक की कुल डील बुकिंग 3.3 अरब डॉलर रही, जो एक साल पहले के मुकाबले 27% अधिक है। इसके साथ ही वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनी की डील बुकिंग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। नतीजों के बाद कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉन्स्टेंट करेंसी आधार पर रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ा दिया। अब कंपनी को 2.5% से 4% की बढ़ोतरी की उम्मीद है। पहले यह अनुमान 1% से 4% था।
देश की सबसे बड़ी आईटी सर्विस कंपनियों में शामिल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नतीजों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सितंबर तिमाही में करीब 15% बढ़कर 13,884 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, मुख्य कारोबार से रेवेन्यू में सालाना आधार पर 11.2% की ग्रोथ दर्ज की गई। TCS ने सितंबर तिमाही में 9.6 अरब डॉलर के कुल नए सौदे हासिल किए। कंपनी के मुताबिक, एआई से जुड़ा रेवेन्यू 3.1 अरब डॉलर रहा, जो उसके कुल रेवेन्यू के 10% से ज्यादा है। इससे संकेत मिलता है कि एआई सेवाएं अब आईटी कंपनियों के कारोबार में अहम भूमिका निभाने लगी हैं।
आईटी शेयरों में तेजी की एक बड़ी वजह एआई बिजनेस को लेकर बढ़ती उम्मीदें हैं। इंफोसिस के सीईओ सलिल पारेख ने बताया कि सितंबर तिमाही में कंपनी के कुल रेवेन्यू में एआई सेवाओं की हिस्सेदारी 8% से ज्यादा रही। इस कारोबार में पिछली तिमाही के मुकाबले डबल डिजिट की दर से ग्रोथ हुई। पारेख के मुताबिक, अगले दो से तीन साल में कंपनी के कामकाज का करीब आधा हिस्सा एआई से जुड़ा हो सकता है। अगर कंपनियां एआई सेवाओं को बड़े पैमाने पर ग्राहकों तक पहुंचाने में सफल रहती हैं, तो इससे नए सौदे मिलने और कमाई बढ़ने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
हालांकि, निवेशकों के सामने असली सवाल यह है कि एआई से जुड़े बड़े दावे कितनी तेजी से वास्तविक कमाई में बदलते हैं। केवल नई तकनीक की मांग बढ़ना काफी नहीं होगा। कंपनियों को इससे लगातार रेवेन्यू बढ़ाने और बेहतर मार्जिन हासिल करने की कैपेसिटी भी दिखानी होगी।
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी भी आईटी शेयरों के लिए मददगार मानी जाती है। भारतीय आईटी कंपनियां विदेशों से बड़ी मात्रा में कमाई करती हैं। ऐसे में डॉलर में मिलने वाले रेवेन्यू को रुपये में बदलने पर उन्हें ज्यादा रकम मिल सकती है। हालांकि, इसका फायदा हर कंपनी को एक जैसा नहीं मिलता। विदेशी खर्च, हेजिंग और कारोबारी लागत जैसे फैक्टर भी असर डालते हैं। इसलिए रुपये में गिरावट को आईटी कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी की गारंटी नहीं माना जा सकता।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, वैश्विक बाजार में एआई शेयरों में गिरावट भारतीय शेयर बाजार के लिए कुछ राहत ला सकती है। इसकी वजह यह है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय शेयरों से पैसा निकालकर अमेरिकी एआई कंपनियों में निवेश कर रहे थे। अगर यह रुझान बदलता है, तो भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम हो सकती है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)
Updated on:
15 Oct 2026 12:59 pm
Published on:
15 Oct 2026 12:38 pm
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