Adani Group bribery allegations: अमेरिका की एक नियामक संस्था ने 2024 से जुड़े मामले में भारत के Adani समूह के अधिकारियों को ईमेल से समन भेजने के लिए अदालत का रुख किया है।
SEC seeks court approval to email summons: अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी को लेकर अमेरिका से एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका की नियामक संस्था सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) भारत सरकार को बायपास करके अडानी को ईमेल के जरिए समन भेज सकती है। SEC ने इसके लिए अमेरिकी अदालत से अनुमति मांगी है। यदि कोर्ट इजाजत देता है, तो फिर एसईसी द्वारा ईमेल के माध्यम से गौतम अडानी को समन भेजा जाएगा। सवाल यह उठता है कि आखिर अमेरिकी रेगुलेटर को भारत सरकार को बायपास करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भारत सरकार को बायपास करने का निर्णय लेने की वजह भी बताई है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, SEC का कहना है कि भारत सरकार समन से जुड़े उसके दो अनुरोधों को पहले ही खारिज कर चुकी है। ऐसे में उसके पास सीधे ईमेल के माध्यम से समन भेजने का ही विकल्प बचा है। इस खबर के सामने आने के बाद यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या किसी दूसरे देश की संस्था के पास भारत सरकार को बायपास करने का अधिकार है और क्या यूएस कोर्ट इस अनुरोध को मंजूरी देगा?
अमेरिका की नियामक संस्था ने न्यूयॉर्क की अदालत से कहा है कि मौजूदा कानूनी प्रक्रिया के तहत समन की तामील पूरी होने की संभावना बेहद कम है। क्योंकि भारत सरकार ने उसके दो अनुरोधों को खारिज कर दिया है। लिहाजा, उसे अरबपति कारोबारी गौतम अडानी और ग्रुप एग्जीक्यूटिव सागर अडानी को सीधे ईमेल के जरिए समन भेजने की अनुमति दी जाए। यह मामला अमेरिका में रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी से जुड़ा है। हालांकि, अडानी समूह इस तरह के सभी आरोपों से लगातार इंकार करता रहा है।
यह मामला 2024 का है, जब अडानी समूह के अधिकारियों पर अमेरिका में रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी का आरोप लगा था। नवंबर 2024 में सामने आए आरोप पत्र में कहा गया कि अडानी ग्रुप के अधिकारी रिश्वत देने की साजिश का हिस्सा थे। यह रिश्वत अडानी ग्रीन एनर्जी द्वारा तैयार बिजली की खरीद सुनिश्चित कराने के लिए दी जानी थी। SEC ने अपनी शिकायत में कहा था कि अडानी समूह ने कंपनी की भ्रष्टाचार-रोधी नीतियों को लेकर गलत एवं भ्रामक जानकारी दी, जिससे अमेरिकी निवेशक गुमराह हुए।
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन का कहना है कि भारत सरकार उसके दो अनुरोधों को खारिज कर चुकी है, इसके पीछे प्रक्रियागत कारणों का हवाला दिया गया है। जैसे कि दस्तावेज पर सिग्नेचर और सरकारी मुहर जैसी औपचारिकताओं का न होना। हालांकि, हेग कन्वेंशन (Hague Convention) जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत जब किसी दूसरे देश में व्यक्ति को समन भेजा जाता है, तो ऐसी औपचारिकताओं की जरूरत नहीं पड़ती। लिहाजा, अब उसे ईमेल के माध्यम से संबंधित लोगों को समन भेजने की अनुमति दी जाए।