डीएमके (DMK) और उसके गठबंधन सहयोगी वामदलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर तनातनी बढ़ गई है। सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे सीपीएम और सीपीआई ने साफ कर दिया है कि वे 2021 विधानसभा चुनावों में मिली 6-6 सीटों से अधिक के लिए दबाव डाल रहे हैं। इस मुद्दे पर अब 17 […]
डीएमके (DMK) और उसके गठबंधन सहयोगी वामदलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर तनातनी बढ़ गई है। सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे सीपीएम और सीपीआई ने साफ कर दिया है कि वे 2021 विधानसभा चुनावों में मिली 6-6 सीटों से अधिक के लिए दबाव डाल रहे हैं। इस मुद्दे पर अब 17 मार्च को अगला दौर होने वाला है, जिससे राजनीतिक हलकों में जिज्ञासा बनी हुई है।
चेन्नई में डीएमके और वामदलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर गतिरोध जारी है। सीपीएम के राज्य सचिव पी. षणमुगम ने बताया कि पार्टी ने अपनी मांगें डीएमके की वार्ता टीम के सामने स्पष्ट रूप से रख दी हैं। डीएमके की ओर से गठबंधन में नई पार्टियों के जुड़ने का हवाला देते हुए अधिक सीटें देने में असमर्थता जताई गई है, लेकिन वामदलों को यह तर्क स्वीकार नहीं है।
सीपीएम के अनुसार, कांग्रेस को पिछले चुनाव से अधिक सीटें दी गई हैं और हाल ही में गठबंधन में शामिल हुई डीएमडीके को भी अन्य सहयोगियों की तुलना में ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। इस पर सवाल उठाते हुए पी. षणमुगम ने कहा, "अगर उन्हें अधिक सीटें दी जा सकती हैं, तो वामदलों को क्यों नहीं?"
वहीं, सीपीआई के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने कहा कि डीएमके के साथ बातचीत जारी है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी की कार्यकारिणी लेगी। सूत्रों के अनुसार, डीएमके ने कुछ सहयोगियों से सीटों की मांग कम करने का सुझाव दिया है, क्योंकि गठबंधन में अब अधिक पार्टियां शामिल हो गई हैं। बावजूद इसके, सीपीआई ने भी 2021 में मिली 6 सीटों से अधिक की मांग की है।
सीपीआई कार्यकर्ताओं ने डीएमडीके को प्रस्तावित 10 सीटों पर चिंता जताई है और कहा है कि पुराने सहयोगियों के लिए सीटों में कटौती से गठबंधन की केमिस्ट्री प्रभावित हो सकती है। डीएमके द्वारा पेश 4 सीटों के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सीपीआई रविवार को अपनी कार्यकारिणी की बैठक करने जा रही है।
फिलहाल डीएमके-वामदलों के बीच बातचीत टल गई है और अब सभी की नजर 17 मार्च को होने वाली अगली वार्ता पर है। सीट बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान से चुनावी समीकरणों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।