
चेन्नई।फोर्टिस मलर अस्पताल के डॉक्टरों ने हाल ही दो बच्चों में वयस्क हृदयों का सफल प्रत्यारोपण कर उन्हें नई जिंदगी दी है। इनमें एक रूसी बच्चा भी शामिल है। देश में यह अपनी तरह का पहला मामला है जिसमें दो कार्डियक अरेस्ट आने के बाद विशेष तकनीक के माध्यम से किसी विदेशी बच्चे को नया जीवन दिया गया है। मंगलवार को आयोजित पत्रकार सम्मेलन में फार्टिस मलर अस्पताल के डॉ. सुरेश राव ने बताया कि तमिलनाडु के तिरुवारुर जिले की निवासी श्री सुप्रिया (12) तथा रूस निवासी रोमन (8) गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे थे। दोनों को तत्काल हृदय प्रत्यारोपण की आवश्यकता थी लेकिन उनकी आयु और आकार के अनुरूप हृदय उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। इसके बाद अस्पताल के कार्डियक साइंस के निदेशक डॉ. केआर बालकृष्णन और डॉ. सुरेश राव केजी ने योजनाबद्ध तरीके से दोनों बच्चों के हृदय गुहा में वयस्क हृदय प्रत्यारोपित कर दिए।
तीन बार कार्डियाक अरेस्ट
डॉ. राव ने बताया कि रूसी नागरिक एकट्रिना अपने आठ साल के बेटे रोमन के हृदय रोग का इलाज कराने के लिए पिछले साल १३ अक्टूबर को चेन्नई के फोर्टिस मलर अस्पताल आई थी। दरअसल केवल 35 प्रतिशत हृदय ही काम करने के कारण रूस के कई चिकित्सकों ने उसका इलाज करने से मना कर दिया था। इस बीच जब उसे कार्डियक अरेस्ट अटैक आया तो उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई और सीपीआर, एक्मो और एडवांस कार्डियक व लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखकर स्थिति को काबू में लाया गया।
ईसीपीआर तकनीक पर रखा जीवित
जब डॉ. केआर बालकृष्णन उसे अस्पताल में लाए तब उसकी हालत काफी चिंताजनक थी और हृदय प्रत्यारोपण ही इसका एक मात्र इलाज था। डोनर मिलने तक उसे ईसीपीआर तकनीक पर रखकर उसे जीवित रखा गया था। आखिरकार १७ जनवरी को उसे एक सडक़ दुर्घटना में ब्रेनडेड घोषित युवक का हृदय मिला जिसे अस्पताल के डॉक्टरों ने आठ वर्षीय रोमन के हृदय गुहा में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित कर दिया। रोमन अब पहले से अच्छा महसूस कर रहा है। उसकी लगातार चिकित्सीय निगरानी रखी गई और अब वह रूस जाने को तैयार है।
अंगदान आया काम
दूसरा मामला तमिलनाडु के तिरुवारुर जिले की रहने वाली १२ वर्षीय श्री सुप्रिया का है जो गंभीर हृदय रोग से जूझ रही थी। जब उसे फोर्टिस मलर अस्पताल में भर्ती कराया गया तब उसे सांस तक लेने में तकलीफ हो रही थी। भविष्य की जटिलताओं से बचने के लिए चिकित्सकों ने उसके अभिभावकों को हृदय प्रत्यारोपण कराने की सलाह दी। हालांकि इसके लिए वे तैयार हो गए लेकिन समय पर सर्जरी नहीं होने की वजह से उसे कार्डियक अरेस्ट का अटैक आया और उसकी हालत काफी बिगड़ गई। इसके बाद उसे (एक्मो) ईसीएमओ लाइफ सपोर्ट पर जिंदा रखा गया। फिर हाल में उसका भी हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। उसे भी एक ब्रेनडेड युवक का हृदय मिला था। उसकी हालत अभी ठीक है।