
MK Stalin Vijay Controversy : के.एन. नेहरू से पूछताछ पर गरमाई राजनीति, स्टालिन ने विजय सरकार को घेरा (फोटो सोर्स: ANI)
MK Stalin Vijay Controversy: तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली ईस्ट विधानसभा उपचुनाव से पहले जांच एजेंसियों की कार्रवाई ने सियासी माहौल गरमा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) प्रमुख एमके स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की जांच को राजनीतिक प्रदर्शन में बदलने की कोशिश हो रही है। स्टालिन ने साफ कहा कि छापेमारी और सोशल मीडिया पर प्रचार के जरिए उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को डराया नहीं जा सकता।
स्टालिन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में आरोप लगाया कि विजय सरकार जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाने के लिए कार्रवाई को प्रचार का माध्यम बना रही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के सामने अब रोडशो और रेडशो में से किसी एक को चुनने का सवाल है। DMK प्रमुख ने सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) पर भी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे लोगों को अपने पाले में लेने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि ऐसी कार्रवाइयों से पार्टी का मनोबल कमजोर नहीं होगा। स्टालिन ने महंगाई, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका कहना है कि DMK आने वाले दिनों में सरकार की नीतियों और कामकाज पर और आक्रामक तरीके से सवाल उठाएगी।
विवाद के केंद्र में DMK के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू भी हैं। तिरुचिरापल्ली के थिल्लई नगर स्थित उनके आवास पर सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) की टीम ने पूछताछ की। अधिकारियों ने एक घंटे से अधिक समय तक उनसे सवाल किए। इस दौरान 200 से ज्यादा DMK कार्यकर्ता उनके आवास के बाहर जुटे रहे।
जांच का संबंध नगर प्रशासन विभाग में जूनियर इंजीनियरों की भर्ती के दौरान कथित तौर पर 634 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी से है। आरोपों में भर्ती प्रक्रिया के अलावा ठेकों के आवंटन और तबादलों में अनियमितताओं की भी जांच की जा रही है। मामले में नेहरू के साथ उनके कुछ रिश्तेदारों और अधिकारियों के नाम भी दर्ज हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से साझा की गई जानकारी के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी। मद्रास हाईकोर्ट ने विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच के निर्देश दिए थे। हालांकि, बाद में अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आगे की सतर्कता कार्रवाई और कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी। ऐसे में जांच से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भी इस पूरे विवाद का अहम हिस्सा है।
राजनीतिक दृष्टि से तिरुचिरापल्ली ईस्ट उपचुनाव दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उस पर नेताओं की प्रतिक्रियाएं चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, आरोपों और राजनीतिक दावों के बीच मामले का अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगा।
Updated on:
29 Oct 2026, 11:55 AM IST
Published on:
29 Oct 2026, 11:28 AM IST
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