तमिलनाडु की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK से निष्कासित नेता ओ.पन्नीरसेल्वम ने DMK(DravidaMunnetraKazhagam) का दामन थाम लिया है। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले यह कदम राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है और AIADMK ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ओ.पन्नीरसेल्वम का […]
तमिलनाडु की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK से निष्कासित नेता ओ.पन्नीरसेल्वम ने DMK(DravidaMunnetraKazhagam) का दामन थाम लिया है। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले यह कदम राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है और AIADMK ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
शुक्रवार को ओ.पन्नीरसेल्वम ने चेन्नई में मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष एम के स्टालिन की उपस्थिति में DMK की सदस्यता ग्रहण की। सूत्रों के अनुसार, इस फैसले से पहले उन्होंने कई बार DMK नेतृत्व से अनौपचारिक बातचीत की थी। AIADMK से निष्कासन और अपनी खुद की पार्टी पर नियंत्रण न बना पाने के बाद आखिरकार उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी का रुख किया।
ओ.पन्नीरसेल्वम का राजनीतिक सफर 1996 में पेरियाकुलम नगर पालिका के चेयरमैन के रूप में शुरू हुआ था। 2001 में वे पेरियाकुलम विधानसभा सीट से AIADMK विधायक चुने गए और जे जयललिता के नेतृत्व वाली सरकार में राजस्व मंत्री बने। जयललिता की सजा के चलते वे पहली बार 21 सितंबर 2001 से 1 मार्च 2002 तक मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद, 2014 और 2016 में भी वे मुख्यमंत्री बने। लेकिन, 2016 में जयललिता के निधन के बाद पार्टी में अंदरूनी कलह बढ़ी और सत्ता संतुलन बदल गया। पार्टी में आंतरिक मतभेदों के चलते उन्हें पद से हटाया गया और बाद में वे डिप्टी सीएम व पार्टी के संयोजक रहे। 2022 में पार्टी में एकल नेतृत्व की मांग उठी, जिससे उनका कोऑर्डिनेटर पद समाप्त हो गया और वे पार्टी से बाहर हो गए।
इसके बाद पन्नीरसेल्वम ने अपनी पार्टी बनाई और 2024 लोकसभा चुनाव NDA के साथ मिलकर लड़ा, लेकिन हार का सामना किया। NDA से अलग होने के बाद वे राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए थे। जब बाकी सारे विकल्प बंद हो गए, उन्होंने DMK जॉइन करके अपनी राजनीतिक यात्रा को नया मोड़ दिया।
DMK में पन्नीरसेल्वम की एंट्री के बाद AIADMK ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने पन्नीरसेल्वम पर एहसान फरामोशी और विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि वह कभी छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे और AIADMK ने ही उन्हें नेता, मंत्री और मुख्यमंत्री बनाया। पार्टी ने जोर देकर कहा कि पन्नीरसेल्वम को कभी ए-फॉर्म और बी-फॉर्म पर हस्ताक्षर करने का सम्मान मिला, लेकिन वे हमेशा पार्टी दफ्तर में बाहरी ही रहे।
AIADMK ने पन्नीरसेल्वम की राजनीतिक चाल को गिरगिट की तरह बताया और कहा कि अब वे "उदयनिधि और इन्बनिधि अमर रहे" के नारे लगाने को मजबूर होंगे। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसा विश्वासघात दंडित नहीं होना चाहिए और कहा कि कार्यकर्ताओं ने उन्हें "राजनीतिकअनाथ" बना दिया है। पार्टी ने यह भी कहा कि पन्नीरसेल्वम का अपने चंद वफादार कार्यकर्ताओं को धोखा देने का पाप पीढ़ियों तक उनका पीछा करेगा। AIADMK ने पन्नीरसेल्वम से अपील की कि वे जयललिता की तस्वीरों का आगे कभी इस्तेमाल न करें।
ओ.पन्नीरसेल्वम का DMK में शामिल होना राज्य की राजनीति में कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या वे DMK में अपनी नई भूमिका में सफल होंगे, या AIADMK के आरोपों का असर उनकी छवि पर पड़ेगा? फिलहाल, उनका यह कदम तमिलनाडु के राजनीतिक समीकरण बदल सकता है।