जैन तेरापंथ सम्प्रदाय के ग्यारहवें आचार्य महाश्रमण के आगामी चेन्नई चातुर्मास के मद्देनजर यहां बसे विभिन्न सम्प्रदाय के वरिष्ठ प्रवासियों की बैठक ट्रिप
चेन्नई।जैन तेरापंथ सम्प्रदाय के ग्यारहवें आचार्य महाश्रमण के आगामी चेन्नई चातुर्मास के मद्देनजर यहां बसे विभिन्न सम्प्रदाय के वरिष्ठ प्रवासियों की बैठक ट्रिप्लीकेन तेरापंथ भवन में रविवार को आयोजित हुई। इस बैठक में समणी निर्देशिका चारित्रप्रज्ञा एवं समणीवृन्द का सान्निध्य मिला।
समणी द्वारा नमस्कार महामंत्र के साथ बैठक शुरू हुई। आचार्य महाश्रमण चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति, चेन्नई के अध्यक्ष धरमचन्द लूंकड़ ने आगंतुक प्रवासियों का स्वागत करते हुए चातुर्मास के सफल आयोजन में सभी की सहभागिता का आह्वान किया। गौतमचन्द सेठिया ने आचार्य महाश्रमण द्वारा प्ररूपित अहिंसा यात्रा के त्रिआयामी उद्देश्य - सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्रदान की। देवराज आच्छा ने माधवरम में चातुर्मास प्रवास एवं दर्शनार्थियों के लिए आयोजित विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए वहां एक छोटी सी कॉलोनी विकसित करने की बात कही।
विमल सेठिया ने आचार्य व्यक्तित्व एवं कृतित्व की जानकारी दी। रमेश खटेड़ ने आचार्य अहिंसा यात्रा के मार्ग की जानकारी देते हुए बताया कि आगामी 5 जुलाई को मिन्जूर में गुरुदेव का तमिलनाडु प्रवेश होगा एवं 8 जुलाई को नेहरू स्टेडियम में भव्य नागरिक अभिनन्दन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। विशाखापट्टनम में 26 अप्रेल से चेन्नई का दायित्व प्रारम्भ होगा।
कान्तिलाल सिंघवी, रतनलाल रांका, चन्द्रप्रकाश मालपानी, जैन महासंघ के पूर्वाध्यक्ष पन्नालाल सिंघवी, मौजूदा अध्यक्ष सज्जनराज मेहता ने भी समन्वित प्रयासों का आश्वासन दिया। नारायणा सेवा संस्था चेन्नईके अध्यक्ष केसरसिंह राजपुरोहित, ट्रिप्लीकेन महावीर भवन के मंत्री मूलचन्द ने भी विचार व्यक्त किए।
समणी निर्देशिका चारित्रप्रज्ञा ने बैठक को संबोधित किया कि आज मानो ट्रिप्लीकेन भवन एक मिनी राजस्थान बन गया है। विभिन्न राजस्थानी कौम के प्रतिनिधियों का आना व दिल से इस चातुर्मास के लिए जुडऩा हमारी सौहार्द्रता, सद्भावना और सहिष्णुता को दर्शाता है। पन्नालाल टाटिया ने सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन गौतमचंद बोहरा ने किया।
जीवन को संपूर्णता की ओर ले जाता है योग
चेन्नई. मुदरांतकम जैन स्थानक में विराजित अमृति मुनि ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि योगाभ्यास के बिना प्रकृति के माया कौशल को जानना संभव नहीं है। जो व्यक्ति योगी होता है, प्रकृति उसके समक्ष मायाजाल नहीं फैला सकती है। सहज शब्दों में उस योगी व्यक्ति में प्राकृतिक लय प्राप्त होती है। इस तरह सत्स्वरूप में अवस्थान के कारण योग को श्रेष्ठ साधना माना गया है। योग जीवन को संपूर्णता की ओर ले जाता है। योग ही धर्म जगत का एकमात्र पथ है। आत्मिक व मानसिक शांति के लिए योग जरूरी है। धर्मसभा को संचालन मंत्री प्रफुल्ल कुमार कोटेचा ने किया।